नैनो तकनीक के माध्यम से पानी होगा पूरी तरह साफ
पानी में घुलने वाले तत्व और किटाणु इतने सूक्ष्म होते हैं कि उन्हें नैनोमीटर के जरिए ही मापा जा सकता है। इसे मानव बाल से 100,000 गुना पतला बताया गया है।
माइक्रोस्कोप से देखने पर पानी में घुलने वाले तत्वों और किटाणुओं के आकार में बड़ा फर्क देखने को मिलता है। पानी में घुलने वाला एक अकेला तत्व एक नैनोमीटर से कम मोटा होता है जबकि सबसे छोटे आकार के किटाणु 200 नैनोमीटर के बराबर हो सकते हैं।
इस विषय से सम्बंधित जर्नल 'नैनो लेटर्स' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के बफैलो विश्वविद्यालय की एक टीम ने एक खास तरह के ब्लॉक को-पॉलीमर के माध्यम से एक नए तरह के नैनो मेम्ब्रेन का विकास किया है, जिसमें 55 नैनोमीटर मोटे आकार की वस्तुओं को छाना जा सकता है। इसमें से पानी आसानी से पार जा सकता है लेकिन किसी भी प्रकार के जीवाणु के लिए यह काफी छोटा रास्ता होगा।
शोधकर्ताओं ने माना है कि दुनिया भर में तमाम तरह की सुधार प्रक्रिया के बाद तैयार 45 फीसदी पीने युक्त पानी में अमोयेबे नाम का कीड़ा रह जाता है। इससे सांस लेने सम्बंधी घातक बीमारियां हो सकती हैं। साथ ही यह निमोनिया के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
नई तकनीत के माध्यम से अमोयेबे को भी पानी से अलग किया जा सकेगा। इससे पानी पूरी तरह पीनेयोग्य हो सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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