वैद्यों के ज्ञान का अभिलेखीकरण जरूरी : निशंक
देहरादून, 22 फरवरी (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को कहा कि आयुर्वेद के वैद्यों के पास अमूल्य पारंपरिक ज्ञान है, जिसके अभिलेखीकरण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जहां एक ओर ऐलोपैथिक चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों को मजबूत कर रही है, वहीं होम्योपैथिक मेडिकल कालेज खोलने पर भी विचार कर रही है।
देहरादून में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आयुष विभाग और उत्तराखण्ड आयुष विभाग के सौजन्य से आयोजित आयुर्वेद विषय पर अयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला 'राष्ट्रीय अभियान : सम्पूर्ण स्वास्थ्य संरक्षण हेतु आयुर्वेद' का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ़ निशंक ने कहा कि राज्य सरकार आयुष को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और अन्य आयुष पद्धतियों पर दुनिया के बढ़ते भरोसे को बनाए रखना और उसे आगे बढ़ाना एक दायित्व है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को चिकित्सा पद्धति से भी कहीं अधिक एक जीवनशैली के रूप में अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में गम्भीर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना होगा।
मुख्यमंत्री निशंक ने इस अवसर पर डॉ़ मायाराम उनियाल की पुस्तिका 'उत्तराखण्ड की वनौषधि दर्शिका' का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ़ सत्येंद्र मिश्रा, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ़ आशा माथुर, अपर सचिव सी़.एस़ नपलच्याल, होम्योपैथिक निदेशक डॉ़ बीसी लखेड़ा, केंद्र सरकार के प्रभारी अनुसंधान अधिकारी डॉ़ जी.सी. जोशी ने भी विचार रखे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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