आखिरकार जेपीसी को तैयार हुई सरकार (राउंडअप)
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद के दोनों सदनों क्रमश: लोकसभा और राज्यसभा में एक बयान देकर जेपीसी के गठन की प्रक्रिया आरम्भ किए जाने का आग्रह किया। विपक्षी दलों ने इस घोषणा पर संतुष्टि जताई है लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा इसकी घोषणा के तरीके की आलोचना की है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से जेपीसी के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध करते हुए सदन को आश्वस्त किया कि इस सम्बंध में औपचारिक प्रस्ताव जल्द ही पेश किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने दोनों सदनों में दिए अपने बयान में कहा, "हमारी सरकार का मानना है कि चूंकि सभी प्रभावी कदम उठाए जा रहे थे, हम विपक्ष को जेपीसी मांग छोड़ने से मना लेंगे लेकिन अपने इस प्रयास में हम सफल नहीं हुए। महत्वपूर्ण बजट सत्र में संसद न चले हम इसे वहन नहीं कर सकते। इस विशेष परिस्थिति में हमारी सरकार जेपीसी के गठन के लिए तैयार हुई है।"
उन्होंने कहा कि विपक्ष की जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में कोई महत्वपूर्ण कामकाज नहीं हो पाया था और इस मुद्दे पर एक और सत्र को बर्बाद नहीं किया जा सकता। यह मसला लम्बे समय तक संसद में गतिरोध का कारण रहा है।
उन्होंने कहा, "मेरी सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के लिए कई कदम उठाए हैं। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है जिसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है। संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) खुद इसकी जांच कर रही है।"
उन्होंने कहा कि एक सक्रिय लोकतंत्र के रूप में देश के सभी मुद्दों का हल विचार-विमर्श से खोजा जाना चाहिए, टकराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं माननीय लोकसभा अध्यक्ष से जेपीसी के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का निवेदन करता हूं। इसके लिए प्रस्ताव जल्द ही लाया जाएगा।"
सूत्रों के मुताबिक जेपीसी के गठन का औपचारिक प्रस्ताव केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल पेश करेंगे। लोकसभा में यह प्रस्ताव लाए जाने के बाद इसे राज्यसभा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
प्रधानमंत्री के इस घोषणा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्वागत करते हुए इसे 'लोकतंत्र की जीत' करार दिया।
लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा, "यह पक्ष या विपक्ष के लोगों की जीत नहीं है, यह लोकतंत्र की जीत है।"
सुषमा ने कहा, "यह भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है कि कठिन परिस्थितियों में भी हम रास्ता निकाल लेते हैं। इस बार इस गतिरोध को खत्म करने में थोड़ा ज्यादा समय लग गया।"
स्वराज ने जेपीसी की मांग माने जाने पर प्रधानमंत्री के अलावा लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, सदन के नेता प्रणब मुखर्जी और संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल को धन्यवाद दिया।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा जेपीसी के गठन की घोषणा के दौरान दिए गए बयान की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा मजबूर किए जाने की बात कहने के बजाय यह घोषणा गौरवपूर्ण तरीके से की जा सकती थी।
जेटली ने कहा, "बयान निराशाजनक था। इस मामले को ज्यादा बेहतर तरीके से हल किया जा सकता था।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान से इस बात का संकेत मिला कि सरकार ने जेपीसी के गठन सहित जो भी कार्रवाई की है वह संसद बाधित होने के कारण की है।
जेटली ने कहा कि जेपीसी के गठन की घोषणा फीके अंदाज के बजाय गौरवपूर्ण तरीके से की जानी चाहिए।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रधानमंत्री द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की घोषणा के तरीके पर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि सरकार जेपीसी के गठन की घोषणा कर अपनी ही पीठ थपथपा रही है।
वरिष्ठ माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, "प्रधानमंत्री यह कहकर अपनी ही पीठ थपथपा रहे हैं कि वह संसद में चल रहे गतिरोध को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि संसद की कार्यवाही चले, जबकि सरकार की निष्क्रियता के कारण ही यह स्थिति पैदा हुई थी।"
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), लोक लेखा समिति (पीएसी) और यहां तक कि न्यायमूर्ति पाटिल की रिपोर्ट सहित सरकार द्वारा दिए गए सभी कारण जाहिर हैं, लेकिन माकपा जेपीसी के जरिए इस बात की जांच चाहती है कि कैसे सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया।"
उन्होंने कहा कि स्वान और यूनिटेक जैसी कम्पनियों ने सरकार से जिस दर पर 2जी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस हासिल किया था, उससे कम से कम छह गुना अधिक दाम पर उन्होंने अपने शेयर बेच दिए।
येचुरी के मुताबिक संसद की स्थायी समिति के गठन की सामान्य प्रक्रिया है जिसमें अध्यक्ष के अतिरिक्त 30 सदस्य होते हैं। जेपीसी गठन के मामले में भी सरकार को यही प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) नेता गुरुदास दासगुप्ता ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने अपना कर्तव्य पूरा किया है। "इस कदम से सरकार ने अच्छा संदेश दिया है। सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से संचालित हो यह प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है।"
कांग्रेसी सांसद और विदेश राज्यमंत्री परणीत कौर ने कहा, "अब सरकार को उम्मीद है कि संसद सुचारु रूप से संचालित होगी। यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है और कांग्रेस इसका स्वागत करती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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