हिमकणों की तरह ही बनती है आकाशगंगा
ऑस्ट्रेलिया की स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्न ोलॉजी के प्रोफेसर दुंकन फोर्ब्स और उनकी टीम ने तीन टेलीस्कोप के माध्यम से आंकड़ों का निरीक्षण किया और इस बात की पुष्टि की कि आकाशगंगा का निर्माण हिमकणों की तरह ही होता है।
मंथली नोटिस ऑफ रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की रिपोर्ट के अनुसार आकाशगंगा की उत्पत्ति के बारे में पिछले साल यही सिद्धांत जर्मनी के अंतरिक्ष विज्ञानी ल्यूड्विग ओसर और उनकी टीम ने दिया था।
फोर्ब्स के अनुसार, "हमने पाया कि आकाशगंगा के निर्माण के दो चरण हैं। पहले में वाष्प के विघटन से तारों के आंतरिक क्षेत्र का निर्माण होता है। इसके बाद यह क्षेत्र बीजकोष की तरह काम करता है, जिसके चारों ओर आकाशगंगा का विकास होता है।"
उन्होंने कहा, "ठीक इसी तरह हिमकणों को भी निर्माण के लिए बीज की जरूरत होती है। हिमकणों के निर्माण के लिए ये बीज बनते हैं धूल के सूक्ष्म कण। इसके बाद जल वाष्पित होकर जमा होता है, जिससे हिमकणों का विकास होता है।"
खगोलविदों का यह निष्कर्ष दक्षिणी आकाश की सबसे बड़ी आकाशगंगाओं में से एक एनजीसी1407 से सम्बंधित आंकड़ों के निरीक्षण पर आधारित है, जिसमें 10 अरब से अधिक तारे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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