माध्यमिक शिक्षा का होगा सार्वजनीकरण : पाटील
बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "हमारी सरकार राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के जरिए माध्यमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण के लिए वचनबद्ध है। बालिकाओं तक माध्यमिक शिक्षा को पहुंचाने के लिए शिक्षा के मामले में पिछड़े देश के 3,500 खंडों में से प्रत्येक में बालिका छात्रावास बनाए जा रहे हैं।"
घंटा भर लंबे अपने अभिभाषण में उन्होंने कहा, "अधिकार आधारित शासन की दिशा में मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम मेरी सरकार का दूसरा कदम है। इस अधिनियम को अमल में लाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है। प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वजनीकरण के लिए ही वैश्विक मध्याह्न् भोजन कार्यक्रम शुरू किया गया। इससे छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई का क्रम टूटने, दोनों ही स्थितियों में सुधार आया है।"
प्रौढ़ साक्षरता पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के प्रमुख कार्यक्रम 'साक्षर भारत' को अधिक से अधिक जिलों में चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा, "साक्षर भारत कार्यक्रम प्रौढ़ साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम खासतौर से समाज के वंचित वर्गो के बीच चलाया जा रहा है। वर्ष 2012 तक इस कार्यक्रम का विस्तार उन सभी 365 जिलों में किया जाएगा, जहां प्रौढ़ महिला साक्षरता का स्तर दयनीय है।"
पाटील ने कहा कि सरकार शिक्षु अधिनियम में परिवर्तन के लिए कदम उठा रही है, ताकि इसमें प्रमापीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों समावेश किया जा सके तथा ऐसा निपुणता प्रशिक्षण दिया जा सके जो बैंकों को स्वीकार हो।
गौरतलब है कि शिक्षु अधिनियम कम्पनियों से यह अपेक्षा रखता है कि वे उनके द्वारा प्रशिक्षित प्रशिक्षुओं के लिए 50 प्रतिशत नई नौकरियां आरक्षित रखेंगी।
राष्ट्रपति ने कहा, "युवा देश होने के नाते हमारा देश बहुत ही लाभान्वित है। हमारे देश के युवा अपनी निपुणता का उपयोग तभी करेंगे, यदि हम उन्हें जनसांख्यिकीय आधार पर लाभांश देंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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