मिस्र की क्रांति पर बेटी का नाम 'फेसबुक' रखा
समाचार पत्र 'डेली मेल' ने वहां के स्थानीय समाचार पत्र 'अल-एहराम' के हवाले से खबर दी है कि करीब 20 वर्षीय जमाल इब्राहिम ने अपनी बेटी को 'फेसबुक' नाम दिया है। दरअसल जमाल मिस्र के शहरों में विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने में फेसबुक द्वारा निभाई गई भूमिका से बेहद खुश हैं।
लड़की का पूरा नाम 'फेसबुक जमाल इब्राहिम' है। जब बच्ची का जन्म हुआ तो जमाल के पारिवार वाले, उसके दोस्त व पड़ोसी उसके इर्द-गिर्द इकट्ठे हो गए और उन्होंने क्रांति के लिए अपनी ओर से लगातार सहयोग देने की बात कही। लोगों का कहना है कि इस क्रांति की शुरुआत फेसबुक से हुई थी।
मिस्र में 50 लाख लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं। फेसबुक उपभोक्ताओं की यह संख्या मध्यपूर्व के किसी भी अन्य देश से ज्यादा है। पिछले महीने क्रांति के दौरान इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या और भी बढ़ गई थी।
पच्चीस जनवरी की क्रांति के बाद फेसबुक पर 32,000 समूह बने और 14,000 नए पेज बनाए गए। सैन्य सरकार ने भी मिस्र के युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल शुरू कर दिया था।
होस्नी मुबारक के इस्तीफे के बाद मिस्र की राजधानी में जगह-जगह फेसबुक का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा हुआ था 'थैंक्यू फेसबुक'।
एक इंटरनेट ब्लॉगर ने तो यहां तक कहा है कि फेसबुक ने मध्यपूर्व/उत्तर अफ्रीका में लोकतंत्र के लिए जो कुछ किया है उसके लिए उसे इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।
मिस्र के लोगों ने सार्वजनिक तौर पर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का शुक्रिया अदा किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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