जितना बोलें, उससे दोगुना सुनें
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। आपके जीवन की हर योजना निश्चित व लिखित रूप में होनी चाहिए। ज्यादातर तो हम लोग संशय में ही रहते हैं कि हम जीवन में क्या करना चाहते हैं? इस शंका से उबरने का एक ही तरीका है, आप स्वयं फैसला कर लें कि आप क्या करना चाहते हैं। हमें उपलब्ध विकल्पों के बारे में भी पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए। सभी चुनावों की अच्छाई व बुराई को ठीक तरह से परख लें, तभी चुनाव करें और उसके बाद काम पर जुट जाएं।
मैंने आई.पी.एस. में भर्ती होने के बाद सरकारी आवासों में ही अपना समय बिताया है। मैंने कभी सोचा ही नहीं कि रिटायरमेंट के बाद मुझे अपना घर बनाना पड़ेगा। फिर मुझे एहसास हुआ कि इस अहम मुद्दे पर मुझे जल्द ही फैसला लेना होगा। मैंने अपने बजट के हिसाब से द्वारिका में फ्लैट लेने का विचार बनाया। गुड़गांव, फरीदाबाद या नोएडा का चुनाव भी हो सकता था। काफी पहलुओं पर सोचने के बाद मैंने निष्कर्ष निकाला कि दिल्ली में सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
हमें प्रदर्शन व विकल्पों में सुधार का सारा श्रेय हमारे पास ही होता है। यह इतना आसान नहीं होता, यह आपके काम करने की आदतों व जीवन की योजनाओं के बारे में भी हो सकता है।
हमारे पास कई लोग आते हैं जो किसी न किसी घटना के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं। हम अपनी रुचि के हिसाब से ही उस व्यक्ति की बात पर ध्यान देते हैं। ऐसा हमारे साथ भी होता है, जब हम दूसरों के यहां जाते हैं। पता लगाएं कि क्या कोई आपसे भावनाएं बांट रहा है या लक्ष्य बांट रहा है? यदि वह भावनाएं बांट रहा है तो आपको उसके प्रति सावधान रहना होगा। एक भावुक व्यक्ति हमेशा संवेदनशील होता है। दूसरों को उत्तर देते समय आपको थोड़ा सोच-विचार कर लेना चाहिए।
बच्चों से बात करते समय भी यही ध्यान रखें। बच्चे कभी अंधेरे से डरें या जादू के नाम से घबराकर अपना डर प्रकट करें तो उन्हें बड़े प्यार से समझाएं। उन्हें समझाते समय आप कुछ तथ्य भी बता सकते हैं। एक दिन मेरे नाती दानिश ने पूछा कि क्या भूत सचमुच होते हैं? मैंने उसे कहा कि यह तो कोई कल्पना होती है, लेकिन उसे विश्वास नहीं हुआ। मैंने उससे कहा कि मुझे वह जगह दिखाए, जहां भूत रहते हैं। वह मुझे अंधेरे बाथरूम में ले गया।
मैंने वहां लाइट जलाई और उसे कोना-कोना दिखाकर कहा कि वहां कोई नहीं था। उसने कहा कि भूत पेड़ के पीछे छिप गए हैं। मैंने उससे कहा कि मुझे उस पेड़ के पास ले चलो। फिर मैंने उसे दिखाया कि वहां भी कुछ नहीं था। वह मुझे उन सभी जगह ले गया, जहां उसे लगता था कि भूत हो सकते हैं, अंत में उसने मान लिया कि कोई भूत नहीं होता।
बच्चे को किसी चीज का जबरदस्ती विश्वास दिलाने की बजाय उसे तर्को से समझाएं और उससे प्यार से पेश आएं। मेरी पत्नी कई बार मुझसे कहती है कि मैं उसकी बात नहीं सुनता। हमारे बच्चे बड़े होकर ब्याहे गए हें और घर में हम दोनों ही रह गए हैं इसलिए मैं पूरा शांत माहौल बनाए रखता हूं ताकि उसकी बात सुन सकूं। कई बार तो मुझे जबरन कोई बात करनी पड़ती है ताकि यह न लगे कि मैं कुछ बोलता ही नहीं।
निजी व व्यावसायिक सफलता पाने के लिए आपको दूसरों की बातों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना सीखना होगा। आप कुछ कहें, अफसोस प्रकट करें या कोई प्रेरणादायक वाक्य कह सकते हैं। ऐसे हालात में लोग आपसे थोड़ी सहानुभूति चाहते हैं, जब वे बात कर रहे हों तो उन्हें सुनें, उनकी बातचीत न काटें और न ही यह सोचें कि बात खत्म होगी तो आपने क्या बोलना है? यही एक अच्छे श्रोता का गुण है। श्रोता के भावों को समझें और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया व्यक्त करें।
जब कोई आपसे मदद मांगे तो अपनी राय अवश्य दें। उस समय आपकी लंबी बातचीत या भाषण उसे बेचैन कर सकता है। दरअसल, बड़े सामाजिक समारोह में कोई भी ज्यादा लंबी बातचीत करना पसंद नहीं करता, यदि वह जीवन की उमंग से भरपूर न हो। उस समय आपको अपने बर्ताव व शब्दों का पूरा ध्यान देना होगा। जितना बोलें, उससे दोगुना सुनें। यदि यह संभव न हो तो जितना सुनें, उससे कम बोलने का प्रयास करें। मित्रों में लोकप्रिय होने के लिए एक अच्छा श्रोता बनना जरूरी है।
अपना स्वभाव हंसमुख बनाए रखें और स्वयं को गंभीरता से न लें, कोई भी गंभीर लोगों को पसंद नहीं करता। यदि कोई आपसे बात करना चाहता है तो उस पर पूरा ध्यान दें। कई बार बोलने से ज्यादा सुनना मायने रखता है। ऐसे हालात में आपका व्यवहार शब्दों से कहीं अधिक कारगर हो सकता है।
अच्छे उत्तर या प्रतिक्रिया देने की बजाय दूसरे व्यक्ति का दृष्टिकोण समझें व उसकी कद्र करें।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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