राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान गूंजे 'जय तेलंगाना' के नारे

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के अभिभाषण के दौरान लगभग एक दर्जन सांसद अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और उन्होंने नारेबाजी की। पाटील दोनों सदनों को संयुक्त रूप से सम्बोधित कर रही थीं।

इस विवादास्पद मुद्दे के कारण पहले भी संसद के दोनों सदनों में कई मौकों पर व्यवधान पैदा हुआ है। इसके बाद ही सरकार ने इस मामले से निपटने के लिए एक समिति गठित की थी।

पाटील के 45 मिनट के संयुक्त सम्बोधन अभी समाप्त होने ही वाला था कि कुछ कांग्रेसी सांसदों ने तेलंगाना के समर्थन में तख्तियां लहराईं और 'जय तेलंगाना" और "वी वांट तेलंगाना" के नारे लगाए।

राष्ट्रपति का भाषण समाप्त होने के साथ ही ये सांसद वापस अपनी सीटों पर बैठ गए। लेकिन जब राष्ट्रपति संसद के केंद्रीय कक्ष से बाहर जा रही थीं, तब भी सांसदों ने तेलंगाना के समर्थन में तख्तियां लहराईं।

कांग्रेसी सांसदों ने बाद में के. केशव राव के नेतृत्व में संसद भवन परिसर में स्थित महात्मा गांधी की मूर्ति के पास धरना दिया। कांग्रेसी सांसद राष्ट्रपति के भाषण में तेलंगाना का कोई जिक्र न होने से नाराज थे।

राव ने कहा कि वह नए राज्य के गठन पर एक व्यापक चर्चा चाहते हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हम तेलंगाना राज्य के गठन पर एक व्यापक चर्चा चाहते हैं। हमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी में पूरा भरोसा है।"

यह पूछे जाने पर कि क्या यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस के खिलाफ है, राव ने कहा कि यह केवल लोकतांत्रिक आचरणों का हिस्सा है और वे इस मुद्दे पर ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे थे। राव ने कहा, "यदि आप लोकतंत्र के बारे में जानते हैं तो इस विरोध में कुछ भी गलत नहीं है। हम इस मुद्दे की ओर ध्यान खींचना चाहते थे। अब तक आंध्र प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर 240 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।"

राव ने कहा, "पृथक तेलंगाना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है लेकिन खास मतभेदों को दूर करने की आवश्यकता है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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