लीबिया में प्रदर्शनकारियों पर भीषण फ़ाय़रिंग, बहरीन में प्रदर्शन

पत्रकारों के त्रिपोली के बाहर जाने की इजाज़त नहीं है और यू-ट्यूब और अन्य स्रोतों से जानकारी आ रही है
लीबिया में प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सैनिकों ने बेनग़ाज़ी शहर में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर मशीन-गनों और अत्याधुनिक हथियारों से फ़ायरिंग की है. उनके मुताबिक इन घटनाओं में बच्चों समेत अनेक लोग मारे गए हैं.
मिस्र और ट्यूनिशिया में भीषण विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद, पिछले कुछ दिनों में लीबिया, बहरीन और यमन में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन तूल पकड़ रहे हैं.
बहरीन में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने दोबारा राजधानी मानामा के पर्ल चौराहे पर कब्ज़ा कर लिया है.
ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में फ़ायरिंग और हिंसा को 'ख़ौफ़नाक और अस्वीकार्य' बताया है. तुर्की ने लीबिया में हो रही घटनाओं को 'भयानक' बताया है.
विलियम हेग का कहना था, "ये स्पष्ट तौर पर ख़ौफ़नाक और अस्वीकार्य है. वहाँ टीवी कैमरे न होने का मतलब ये नहीं कि दुनिया का ध्यान लीबिया की सरकार के कारनामों पर केंद्रित न हो."
लीबिया में पिछले लगभग 41 साल से कर्नल गद्दाफ़ी सत्ता में बने हुए हैं. मिस्र में ग्यारह फ़रवरी को सत्ता परिवर्तन के बाद से लीबिया में लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन ज़ोर पकड़ रहे हैं.
लीबिया की राजधानी त्रिपोली से लगभग 1000 किलोमीटर दूर स्थित बेनगाज़ी में प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अफ़रा-तफ़री और अराजकता का माहौल है.
उनका कहना है कि सैनिकों ने इमारतों की छतों से प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा और गोलियाँ चलाई हैं.
बेनग़ाज़ी में एक मृतक प्रदर्शनकारी के नमाज़े जनाज़ा के दौरान हुई फ़ायरिंग में कम से कम 15 लोग मारे गए हैं.
इससे पहले मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा था कि बुधवार से शुक्रवार तक की हिंसा में 84 लोग मारे गए थे. इस तरह से सरकार विरोधी प्रदर्शनों में कुल मारे गए लोगों की संख्या 100 से ज़्यादा हो गई है.
टीवी पर दिखाई गई तस्वीरों से पता चला है कि हिंसा शनिवार देर रात तक चलती रही और स्थानीय अस्पतालों में अब भी घायल लोगों को लाया जा रहा है.
स्थानीय अस्पताल में मौजूद एक डॉक्टर के मुताबिक उन्होंने और उनके सहयोगी डॉक्टरों ने सैकड़ों घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज किया है. एक डॉक्टर ने कहा कि बेनग़ाजी में स्थिति नरक जैसी है और उन्होंने देखा कि पूरे दिन गोलियाँ लगने से घायल लोगों को अस्पताल में लाया जा रहा था.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा है, "पंद्रह लोग नहीं, दर्जनों लोग मारे गए हैं..." इस व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी गई है.
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "बेनग़ाज़ी में केवल सरकारी इमारत पर ही सेना का कब्ज़ा है और बाक़ी के शहर को आज़ाद करा लिया गया है. स्थानीय सरकारी दफ़्तरों और थानों को आग लगा दी गई है. हज़ारों प्रदर्शनकारी न्यायालय की इमारत के आसपास एंबुलेंस, अस्थायी क्लिनिक्स, स्पीकर इत्यादी के साथ जमा हो रहे हैं."
इस प्रत्यक्षदर्शी की जानकारी की स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टी नहीं हो पाई है.
लीबिया में पत्रकारों को राजधानी त्रिपोली से बाहर जाने की इजाज़त नहीं है और इन घटनाओं के कुछ ही विवरण मिल रहे हैं.
उधर बहरीन में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने राजधानी मानामा के मुख्य चौराहे पर्ल स्क्वेयर पर दोबारा से कब्ज़ा कर लिया है.
शिया बहुसंख्यक बहरीन पर अल्पसंख्यक सुन्नी शासकों को राज है. वहाँ प्रमुख शिया विपक्षी दर के महासचिव शेख़ अली सलमान ने प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई की सराहना की है.
प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वे बहरीन में उसी तरह का बदलाव लाने के बारे में प्रतिबद्ध हैं जैसा मिस्र और ट्यूनिशिया में लाया गया है.
वे सुन्नी शासकों पर दमन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं.
बहरीन के युवराज शेख सलमान बिन हमाद अल ख़लीफ़ा ने अल अरेबिया टीवी चैनल को बताया है कि सरकार कुछ मूल माँगे पूरी करने में नाकाम रही है और इस स्थिति को सही करने की ज़रूरत है. वे विपक्षी नेताओं से बातचीत कर रहे हैं.












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