लीबिया में अब तक 45 मरे, यमन और बहरीन में प्रदर्शन (राउंडअप इंट्रो-1)

ईरान में विभिन्न कट्टरपंथी संगठनों, 200 से अधिक सांसदों और सरकार समर्थकों ने विपक्षी नेताओं मीर-हुसैन मौसावी और मेहदी करौबी के खिलाफ प्रदर्शन करने का फैसला किया है। सीरिया में लोगों ने पुलिस हिंसा के खिलाफ यातायात को घंटों बंद रखा।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार विपक्षी संगठनों ने इंटरनेट पर जानकारी दी है कि 41 वर्षो से देश पर शासन कर रहे मुअमर गद्दाफी के खिलाफ शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू होंगे।

यहां 'आक्रोश दिवस' के बाद भी लोगों का प्रदर्शन जारी है। हजारों की संख्या में लोग बेनगाजी शहर में सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन कर रहे लोग व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को कमजोर करने के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है।

ज्ञात हो कि गुरुवार को पूरे लीबिया में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक संघर्ष हुए थे। इन संघर्षो में 45 लोग मारे गए थे और दर्जनों घायल हो गए थे। विपक्ष ने इस दिन को 'आक्रोश दिवस' का नाम दिया था।

इंटरनेट पर जारी किए गए वीडियो फूटेज में विभिन्न स्थलों पर पड़े कई युवकों के शव, तथा पूर्वी तटीय शहर तोबरुक में गद्दाफी की 'ग्रीन बुक' के सम्मान में बनाए गए एक स्मारक को ध्वस्त करते हुए दिखाया गया है।

गद्दाफी की 'ग्रीन बुक' पहली बार 1975 में प्रकाशित हुई थी। इसमें गद्दाफी ने लोकप्रिय समितियों के जरिए प्रत्यक्ष लोकतंत्र के अपने दर्शन का प्रतिपादन किया है। आलोचकों का कहना है कि वास्तव में गद्दाफी उन समितियों का इस्तेमाल राजनीतिक दमन के लिए करते हैं।

यमन में शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों पर हुए दो अलग अलग हमलों में चार लोग मारे गए जबकि दर्जन भर लोग घायल हुए।

समाचार एजेंसी डीपीए ने वेबसाइट यमनपोस्ट डॉट नेट के हवाले से बताया कि अदन के दक्षिणी बंदरगाह शहर में प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस छोड़े और लाठी चार्ज किया।

सुरक्षाकर्मियों की इस कार्रवाई में दो लोग मारे गए जबकि काफी संख्या में लोग घायल हुए।

प्रदर्शनकारियों का यह आठवां दिन है। प्रदर्शनकारी पिछले 32 वर्षो से सत्ता में काबिज राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के शासन के अंत की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा तैज के दक्षिणी शहर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुए ग्रेनेड हमले में दो लोगों की मौत हो गई। इस हमले में 40 लोग घायल हुए।

वेबसाइट के मुताबिक जिस व्यक्ति ने ग्रेनेड फेंका था उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

बहरीन के मनामा में शुक्रवार को सेंट्रल स्कवायर की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने ऊन पर रबर की गोलियां और आंसू गैस के गोले छोड़े।

समाचार एजेंसी डीपीए ने मनामा के सलमानिया मेडिकल सेंटर के हवाले से बताया कि पुलिस के साथ हुई झड़प में कम से कम 50 लोग घायल हुए।

एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि शुक्रवार को हुई गोलीबारी में मारे गए पीड़ित की याद में वे एक गांव से शांतिपूर्ण रैली निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारी जब स्कवायर के करीब पहुंचे तो पुलिस ने ऊन पर गोलियां चलाईं।

मोहम्मद नबी (27) ने बताया, "पुलिस सिर और सीने को निशाना बनाकर गोलियां चला रही थी। हम लोग शांतिपूर्ण के नारे लगा रहे थे लेकिन सरकार कत्लेआम करने की इच्छुक है लेकिन हम भयभीत नहीं हैं।"

विदेश मंत्री खालिद इब्न अहमद खालिफा ने कहा कि प्रदर्शनकारी 'देश का ध्रुवीकरण' कर रहे हैं और इसे 'सांप्रदायिक खाई' की ओर ले जा रहे हैं।

उधर, ईरानी अधिकारी शुक्रवार को दो मुख्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

विभिन्न कट्टरपंथी संगठनों, 200 से अधिक सांसदों और सरकार समर्थकों ने मीर-हुसैन मुसावी और मेहदी कारूबी को इस्लामी परंपरा को कमजोर करने और विदेशियों का साथ देने के आरोप में गिरफ्तार करने और सजा देने की मांग की है।

शुक्रवार को नमाज के बाद इकट्ठा होने वाली भीड़ में इस मांग के दोहराए जाने की उम्मीद है। विपक्षी समूह ग्रीन वेव के नेता मुसावी और कारूबी ने मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शन के समर्थन में सोमवार को एक रैली बुलाकर सत्ता को नाराज कर दिया है।

सुरक्षा बलों द्वारा इस रैली को तितर बितर करने के लिए की गई हिंसक कार्रवाई में दो लोग मारे गए थे।

न्यायपालिका के प्रमुख अयातुल्लाह सादिक अमोलीलारीजानी ने गुरुवार को विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने और सजा देने की मांग से खुद का अलग करते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया को कानून सम्मत और न्यायोचित होना चाहिए।

मुसावी और कारूबी ने एक ऑनलाइन बयान जारी कर सोमवार को प्रदर्शन का दमन करने की आलोचना की और इस आरोप को खारिज किया कि उनका विदेशी ताकतों से कोई सम्बंध है।

मुसावी इरान के पूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं और कारूबी ईरान संसद के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने ईरान में 1979 के आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई और 1980 दशक में अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के प्रमुख सहयोगी रहे हैं।

दमिश्क में यातायात पुलिस द्वारा गुरुवार को कथित रूप से एक युवक को पीटे जाने के विरोध में सैकड़ों की संख्या में सीरिया के लोगों ने पलिस की हिंसा का विरोध किया।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक दुबई स्थित वेबसाइट 'ऑल फॉर सीरिया डॉट इनफो' ने लोगों के विरोध प्रदर्शन वाले वीडियो को अपने वेबसाइट पर डाला है।

वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस के विरोध में नारे लगाते हुए दिखाया गया है। कुछ लोगों ने नारे लगाए, "सीरिया के लोग अपमानित नहीं होंगे।"

प्रदर्शकारियों की मांग है कि गृह मंत्री युवक को पीटे जाने की घटना की जांच कराएं। उन्होंने गृह मंत्री को घटनास्थल पर पहुंचने और पीड़ित परिवार से बात करने की मांग को लेकर यातायात को तीन घंटे तक बंद रखा।

सीरिया के विपक्षी समूहों ने लोगों से राष्ट्रपति बशर अल अशद के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखने के लिए कहा है।

उल्लेखनीय है कि ट्यूनीशिया और मिस्र में सत्ता परिवर्तन से प्रेरित होकर अरब के अन्य देशों लीबिया, बहरीन और ईरान में भी लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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