फिक्की ने मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए की पहल
'रिजोल्विंग डिस्प्यूट थ्रू मेडिएशन : ए विन-विन एप्रोच फॉर बिजनेस' शीर्षक विषय पर आयोजित सेमिनार में डीडीआरएस के अध्यक्ष और दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायधीश एम. एल. मेहता ने कहा कि कारोबारी कम्पनियां साझीदारी के समझौते में यह व्यवस्था कर सकती हैं कि विवाद की स्थिति में वे कानूनी मुकदमा की जगह मध्यस्था का रास्ता चुन सकें।
मेहता ने कहा कि आज दुनिया भर के निवेशक भारत में निवेश करना चाहते हैं ऐसे में यहां कानूनी प्रक्रिया का अत्यधिक लम्बा खिंचना और अदालत द्वारा न्याय की व्यवस्था उनके निवेश के फैसले के सामने सबसे बड़ी बाधा बन रही है।
उन्होंने कहा कि फिक्की मध्यस्थता की प्रक्रिया को लोकप्रिय बनाने की कोशिश कर रही है।
मेहता ने कहा कि देश की अदालतों में लम्बित पुराने मामलों को निपटाने में 320 वर्ष लग जाएंगे।
डीडीआरएस दिल्ली सरकार की संस्था है, जो देश दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में मध्यस्थता केंद्र खोल रही है। इन केंद्रों पर पड़ोसी, पारिवारिक, उपभोक्ता, चेक बाउंस और सरकारी विभागों से सम्बंधित विवादों का निपटारा किया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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