काम ही नहीं, आराम भी है जरूरी

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। कुछ लोग दूसरों से मदद मांगने लगते हैं, जबकि कोई भी व्यक्ति सभी मामलों का विशेषज्ञ नहीं होता। इसकी बजाय कुछ ऐसे लोगों से बात करनी चाहिए जो कमोवेश आपके जैसे हालात से निपट चुके हों।

कठिन समय में सहायक मित्रों व परिवार की मदद लें। काम को थोड़ा बांट लें और बीच- बीच में काम को रोककर आराम लें, ताकि थकान न हो जाए। मिसाल के तौर मुझे कई बार भाषण आदि देने के लिए कार्यक्रमों में जाना पड़ता है, मैं वहां उतना ही काम हाथ में लेता हूं, जिसे मैं आसानी से कर सकूं।

अगर आप किसी के लिए काम कर रहे हैं तो प्रबंधकों को बता दें कि आप किस तरह अच्छा और उत्पादक कार्य कर सकते हैं। कठोर भावनाओं व तनाव से बचने के लिए व्यायाम भी एक अच्छा साधन हो सकता है। काम करते समय बीच में थोड़ी चहलकदमी कर लें या गहरी सांसें लें, इससे आपको ताजगी मिलेगी।

तनाव मुक्ति के ऐसे सहज उपाय आपकी उत्पादक क्षमता को बढ़ाते हैं। अपनी जीवनशैली को प्राथमिकता देने और अपनी जरूरतों पर ध्यान देते समय कभी भी अपराध बोध महसूस न करें। कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं दोपहर को सोता हूं तो उन्हें बताता हूं कि दोपहर के 20 मिनट का आराम या झपकी मुझे देर रात तक काम करने के लिए तरोताजा कर देती है।

जिस तरह कार को पेट्रोल चाहिए, उसी तरह हमारे शरीर को भी काम करने के लिए पानी और भोजन चाहिए। कई बार मुझे आधी रात को भूख लग जाती है और मुझे खाना पड़ता है। अगर मैं न खाऊं तो दिमाग में खाना ही घूमता रहता है और में सो नहीं पाता। इसलिए मुझे एहसास हो गया कि जीवन में भोजन के क्या मायने हैं। जब भी मैं रात का भोजन नहीं करता तो मुझे आधी रात को उठकर कुछ खाना पड़ता है।

अपने जीवन की जिम्मेदारी लें : यह हमारे जीवन की असलियत है कि हम अक्सर अपनी गलतियों के लिए दूसरों को कसूरवार ठहराते हैं और अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते । अगर आपको अपनी पत्नी या मित्र से कोई परेशानी है तो आप आसानी से उन्हें ही दोषी ठहरा देते हैं। कहीं देर से पहुंचे तो ट्रैफिक को दोषी ठहरा देते हैं और यह नहीं मानते कि हम ही घर से पर्याप्त समय लेकर नहीं निकले थे। अगर आत्मविश्लेषण करें तो हमें पता चलेगा कि दरअसल हमारे चुनाव और फैसले ही गलती की असली वजह होते हैं।

अपनी जिम्मेदारी न समझने के कारण ही यह दोषारोपण का खेल चलता रहता है। इस तरह लोग अपने बारे में सही राय नहीं बनाते और आप हालात के शिकंजे में फंस जाते हैं। उस समय आप बिल्कुल बेबस होते हैं। जो अपने जीवन में हर बात के लिए जिम्मेदारी समझते हैं केवल वही महसूस कर सकते हैं कि वे अपनी प्रसन्नता के लिए भी जिम्मेदार हैं।

अपनी भूल स्वीकारें : अक्सर लोग अपनी गलतियां नहीं मानते। हम सब गलतियां करते हैं, लेकिन कुछ भले लोग ही अपनी गलती की माफी मांगते हैं। मेरा अपना वजन 175 से 185 पौंड के बीच घटता-बढ़ता रहता है। यहां सच्चाई यही है कि मेरे अलावा इसके लिए किसी दूसरे को दोषी नहीं माना जा सकता। ऐसा मेरे खाने की आदतों की वजह से है।

पारंपरिक रूप से मुझे घी-तेल वाला मसालेदार खाना पसंद है, जबकि कभी-कभी मैं उबला हुआ भोजन लेता हूं। मैं वजन घटाने के लिए क्रेश डाइटिंग करता हूं और कुछ ही समय में वजन दोबारा बढ़ जाता है। इसके लिए मैं खुद ही दोषी हूं, लेकिन रसोइए को खाने में ज्यादा तेल डालने के लिए दोषी ठहराया जा सकता है।

कुछ लोग मेरे साथ घनिष्टता बनाने की कोशिश करते हैं तो मैं अपने व्यवहार से उन्हें जता देता हूं कि वह मुझे पसंद नही हैं। मेरा ड्राइवर अक्सर ऐसा करता है और काम पर अक्सर देरी से पहुंचता है। मैंने उसे चेतावनी दे दी कि अगली बार देर से आने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। उसने परवाह नही की। मैंने उसे वेतन देते समय काम पर न आने को कहा।

दरअसल, हमारे ही बर्ताव पर निर्भर करता है कि लोग हमसे कैसा बर्ताव करते हैं। जब तक आप उन्हें चेताएंगे नहीं तो वे आपका नाजायज फायदा उठाते रहेंगे। हमें स्वयं अपनी मुश्किलों से ऊपर उठकर अपने लिए प्रसन्नता खोजनी होगी। जो भी कुछ घटता है, हमारे ही वजह से होता है। किसी भी समस्या से निपटना हो तो उसका दायित्व लेना सीखें। दायित्व ही जीवन में बेहतरी के लिए सकारात्मक बदलाव लाता है।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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