कार्यशैली बनाती है आपको महान

तरुण इंजीनियर

नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। भरतराम हीरे-जवाहरात के एक बड़े व्यापारी थे। उन्होंने कभी भी व्यापार में किसी के साथ अन्याय नहीं किया था, क्योंकि वे दूसरे व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखते थे।

एक बार उन्होंने किसी व्यापारी से जवाहरात का सौदा किया। भाव तय हो गया और यह भी निर्धारित हो गया कि अमुक समय के भीतर वह व्यापारी भरतराम को जवाहरात दे देगा। फिर दस्तावेज पर दोनों पार्टियों के हस्ताक्षर हो गए।

संयोग से उस अवधि में जवाहरात के भाव बढ़ गए। उस भाव पर यदि वह माल देता, तो उसे भारी नुकसान हो जाने की आशंका थी। बेचारा व्यापारी संकट में पड़ गया, लेकिन उसे अपना वचन तो निभाना ही था।

भरतराम को जब मूल्य बढ़ जाने की बात मालूम हुई, तब वह उस व्यापारी की दुकान पर गए। लेकिन भरतराम कुछ कहते, उससे पहले ही व्यापारी ने कहा, "सेठ जी, विश्वास रखिए, मैं अपने वादे को हर हाल में पूरा कर दूंगा। आप चिंता न करें।"

भरतराम बोले, "मैं जानता हूं कि आप अपने वादे को हर हालत में पूरा करेंगे। लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि आप बेहद चिंतित हैं और आपकी चिंता का कारण हैं वे दस्तावेज, जिन पर आपने हस्ताक्षर किए हैं। यदि उन दस्तावेजों को मैं नष्ट कर दूं तो आपकी चिंता का अंत अपने आप हो जाएगा।"

व्यापारी ने कहा, "नहीं सेठ जी आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है, मुझे केवल दो दिन का समय और दीजिए।"

भरतराम ने उसकी एक न सुनी, फिर उन्होंने दस्तावेज निकाले और उसके टुकड़े करते हुए बोले, "यह दस्तावेज आपके हाथ-पैर बांधता था, इसलिए मैंने इसे फाड़ दिया है। सौदे में भाव बढ़ जाने से मेरे साठ-सत्तर हजार रुपये आपकी ओर निकलते, लेकिन आपकी स्थिति मैं जानता हूं। आप कहां से देते इतनी बड़ी रकम?"

व्यापारी ने भरतराम के चरण पकड़ लिए। भरतराम ने उसे उठाकर सीने से लगाया और कहा, "बुरे समय में एक-दूसरे की सहायता करना, व्यापार की कार्यशैली का हिस्सा होता है, जिसे मैं पूरी तरह से निभाता हूं।"

इसलिए अपनी कार्यशैली पर ध्यान दीजिए और इन गुरुमंत्रों पर अमल कीजिए :

* आपके मस्तिष्क में सैकड़ों एकड़ उर्वर भूमि है, लेकिन उस भूमि पर आपको क्या बोना है, यह आपकी कार्यशैली पर निर्भर है।

* प्रतिबद्धता को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर कामयाबी की बुलंदियों को छुआ जा सकता है, क्योंकि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपने काम को निश्चित अवधि तक पूरा करना बहुत आवश्यक है।

* अनुशासन आपको इस योग्य बनाता है कि आप अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकें। अनुशासन एक कौशल है जिसे आप आसानी से सीख सकते हैं।

* महत्व इस बात का नहीं है कि आपमें कितनी बुद्धि है, बल्कि महत्व इस बात का है कि जो आपके पास है, उसका आप किस तरह इस्तेमाल करते हैं।

* जब आप अमीर दिखते हैं, तब लोगों की आपके साथ व्यापार करने की संभावना अधि बढ़ जाती है।

* कुछ लोग कहते हैं कि आप फलां काम नहीं कर सकते, लेकिन जब आप उस काम को करके दिखाते हैं, तब वह आपकी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी बन जाती है।

* लोगों से काम निकालने का बस एक ही तरीका है कि आप उनकी तारीफ करें, क्योंकि तारीफ सुनना लोगों की बहुत बड़ी कमजोरी होती है।

* कहते हैं कि परिवर्तन के तूफान को कोई नहीं रोक सकता, तभी तो यमुना किनारे गोपियों के वस्त्र छिपाने वाले कृष्ण महाभारत युग से निकलकर अब 'बिजनेस स्कूलों' तक पहुंच गए हैं।

* यदि आप जानना चाहते हैं कि जिंदगी ने आपके साथ क्या किया? तब आप यह जरूर जान जाएंगे कि आप जिंदगी के साथ क्या कर सकते हैं।

(डॉयमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित पुस्तक 'सीक्रेट्स ऑफ सक्सेस' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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