आंध्र प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही लगातार दूसरे दिन बाधित

हैदराबाद। पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के सदस्यों ने लगातार दूसरे दिन आंध्र प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही बाधित की।टीआरएस सदस्यों की मांग है कि विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाए, जिसमें केंद्र सरकार से आग्रह किया जाए कि वह पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए संसद में विधेयक पेश करे।

सदन में उस समय हंगामे की स्थिति पैदा हो गई, जब टीआरएस के विधायक विधानसभा अध्यक्ष के आसन की ओर बढ़े। सदस्यों ने अन्य कामकाज को स्थगित कर तेलंगाना पर बहस कराने की मांग की। तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के विधायक भी टीआरएस विधायकों के साथ हंगामे में शामिल हो गए। तेदेपा विधायक शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के लिए कोष जारी करने की सरकार से मांग कर रहे थे।

सत्ताधारी कांग्रेस का संकट तब और बढ़ गया, जब उसके अपने ही 14 विधायकों ने दिवंगत मुख्यमंत्री वाई.एस.राजशेखर रेड्डी के छाया चित्र वाली तख्तियां लहराईं और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए कोष जारी करने की मांग की। ये सभी कांग्रेसी विधायक विद्रोही नेता वाई.एस.जगनमोहन रेड्डी के समर्थक हैं।सरकार पर विभिन्न निजी पेशेवर कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे समाज के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में 3,500 करोड़ रुपये की देनदारी है। यह योजना तत्कालीन मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने शुरू की थी।

इन कॉलेजों के प्रबंधन ने धमकी दी है कि यदि 24 फरवरी तक सरकार इस राशि का भुगतान नहीं करेगी तो कॉलेजों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया जाएगा।विधायकों द्वारा सदन के सुचारु संचालन के विधानसभा उपाध्यक्ष के अनुरोध को अनसुना कर दिए जाने के कारण, उपाध्यक्ष नादेंदला मनोहर को सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी है।सदन की बैठक जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी दलों के विधायक स्थगन प्रस्ताव पर बहस कराने की मांग करने लगे। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।

सदन की बैठक जब दोबारा शुरू हुई, तो भी विपक्षी विधायकों का प्रदर्शन जारी रहा। परिणामस्वरूप दूसरी बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। उपाध्यक्ष ने गतिरोध समाप्त करने के लिए कोई समाधान निकालने हेतु सभी दलों के सदन के नेताओं की अपने कक्ष में एक बैठक बुलाई।इसके पहले कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक मल्लु भट्टी विक्रमार्का ने गुरुवार को सदन में घटी घटनाओं में शामिल रहे सदस्यों के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस पेश किया।

विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें नोटिस मिल गया है और वह उस पर निर्णय लेंगे।ज्ञात हो कि गुरुवार को जब राज्यपाल ई.एस.एल.नरसिम्हन दोनों सदनों को संयुक्त रूप से सम्बोधित कर रहे थे, तो विधायकों ने सदन से माइक उखाड़ लिए थे, नरसिम्हन के हाथ से कागज छीन लिए थे, उनके भाषण की प्रतियां फाड़ उन्हीं पर फेंक दी थीं। राज्यपाल की कुर्सी गिरा दी गई थी और भाषण स्तंभ वहां से हटा दिया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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