तेलंगाना में असहयोग आंदोलन

तेलंगाना राजनीतिक संयुक्त एक्शन कमिटी (जेएएन) चाहती है कि केंद्र बजट सत्र के दौरान अलग राज्य संबंधी विधेयक संसद में पेश करे और इसी उद्देश्य से दबाव बनाने के लिए अहयोग आंदोलन का आह्वान किया गया है.
जेएएन के संयोजक ए कोदंदरम ने संवाददातों को बताया कि तेलंगाना क्षेत्र के सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और राज्य के अन्य संस्थानों के कर्मचारी गुरुवार से इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे.
इसी दौरान आंध्र प्रदेश विधानसभा में भी बजट सत्र चल रहा होगा. बजट सत्र के दौरान तेलंगाना के लोग ऑफिस जाएंगे लेकिन बिल्कुल काम नहीं करेंगे. कोदंदरम का कहना था कि सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, परिवहन कर्मचारी और छात्र अलग अलग मिलकर यह तय करेंगे कि वो इस आंदोलन में किस तरह की भूमिका निभाएंगे.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इस टिप्पणी पर कि तेलंगाना का मुद्दा जटिल और संवेदनशील है और एक दिन में इसे सुलझाना मुश्किल है, कोदंदरम का कहना था कि कांग्रेस का आलाकमान आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के धनी लोगों के प्रभाव में आ गया है.
उनका कहना था, ''कांग्रेस नेतृत्व निष्पक्ष नहीं है. हमें लगता है कि वो रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश के प्रभुत्व वाले लोगों के बहकावे में आ गया है.""
उन्होंने कहा कि तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों ने भी जब दिल्ली में अलग राज्य की मांग के लिए धरना प्रदर्शन किया तो भी कांग्रेस आलाकमान ने उन पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी के सांसदों का भी आह्वान किया कि वो असहयोग आंदोलन में हिस्सा लें.
इस बीच तेलंगाना बिजली कर्मचारी संयुक्त एक्शन कमिटी ने भी अलग राज्य की मांग का समर्थन करने की बात कही है. आंदोलन के दौरान उनके कर्मचारी काले फीते लगाकर काम करेंगे और उन ग्राहकों पर बिल के लिए ज़बर्दस्ती नहीं करेंगे जो अभी तक पैसे नहीं दे सके हैं.
बिजली कमिटी ने कहा है कि जो कोई कंपनी अपने परिसर में जय तेलंगाना का बोर्ड लगाएगा उसका काम बिजली कर्मचारी तेज़ी से करेंगे. तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने कहा कि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले किसी भी कर्मचारी को अगर राज्य सरकार ने निशाना बनाया तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा.












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