पहले से जारी परियोजना में क्यों रोका जाए खनन : रमन सिंह

रायपुर, 17 फरवरी (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि इस्पात और कोयला आधारित बिजली परियोजनाएं लगाने से हजारों गरीब परिवारों को रोजगार मिलेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि 'नो गो क्षेत्र' में पहले से शुरू हो चुकी परियोजनाओं में खनन पर पाबंदी लगाने का कोई तुक नहीं है।

रमन सिंह ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा कि दक्षिण में बस्तर क्षेत्र में कई बड़े इस्पात संयंत्र लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही उत्तर में कई कोयला आधारित बिजली परियोजनाओं पर विचार जारी है। ये परियोजनाएं दो-से-पांच सालों में शुरू होंगी।

उन्होंने कहा कहा कि इस औद्योगीकरण का मुख्य मकसद लोगों को रोजगार मुहैया कराना है। इससे लोगों के जीवन में क्रांतिकारी सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि नक्सलियों और सेना के बीच पिस रही दस लाख से अधिक आबादी वाले बस्तर क्षेत्र में इस्पात संयंत्र के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है।

सिंह दिसम्बर 2003 से राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री हैं।

'नो गो क्षेत्र' में बिजली परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण पर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि यह वैसा ही मामला है कि सरकारी अनुमति से कानून के मुताबिक घर बन जाने के बाद मकान के मालिक से अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा जाए।

केंद्र सरकार ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में कोयले के खनन की अनुमति देने के मामले में पर्यावरण, कोयला और बिजली मंत्रालय के मतभेदों को दूर करने के लिए यह मसला मंत्रियों के एक समूह के हवाले कर दिया है।

इफको सहित कई कम्पनियों ने इन क्षेत्रों में बिजली परियोजनाओं के लिए जमीन की खरीददारी कर रखी है और काफी निवेश कर रखा है। 'नो गो क्षेत्र' के कारण उन्हें कोयला ब्लॉक या कोयला लिंकेज नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में अंतिम निर्णय हालांकि अब मंत्रियों का समूह करेगा।

सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा है कि यदि सरकार 'नो गो क्षेत्रों' में कोयला ब्लॉक नहीं देना चाहती है, तो इस क्षेत्र को कोयला ब्लॉक क्यों घोषित कर रखा है।

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार 'नो गो क्षेत्र' में खनन की इजाजत नहीं देना चाहती है तो सरकार को उन्हें बहुत पहले बता देना चाहिए था न कि कम्पनियों द्वारा काफी निवेश करने के बाद अब।

इस्पात कम्पनी नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी), टाटा स्टील जैसी कम्पनियों की बस्तर इलाके में इस्पात संयंत्र शुरू करने की योजना है।

उत्तर का जनजाति बहुल सरगुजा क्षेत्र कोयला समृद्ध क्षेत्र है और यहां कई ताप बिजली परियोजनाएं शुरू होने जा रही हैं।

सरकार यहां निजी कम्पनियों को अल्युमिनियम संयंत्र लगाने की अनुमति देने की योजना पर भी काम कर रही है।

सिंह ने साक्षात्कार के दौरान कहा कि इन क्षेत्रों से लौह अयस्क का निर्यात नहीं होना चाहिए, बल्कि यहीं उद्योग की स्थापना की जानी चाहिए, जिससे कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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