जार्डन के शाह की शक्तियों में कटौती चाहते हैं प्रदर्शनकारी

समाचार चैनल 'प्रेस टीवी' के अनुसार बुधवार को अम्मान में जुटे बुद्धिजीवियों और छात्र प्रदर्शनकारियों ने संसदीय सरकार और आर्थिक सुधार की मांग करते हुए धरना प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने राजमहल के सामने बैठकर 'प्रतीकात्मक' रूप में विरोध जताया। लोगों ने बैनर ले धरना दिया। बैनर पर 'जनता अपनी सरकार और संविधान में सुधार शुरू करना चाहती है' लिखा था।

जार्डनवासियों ने उत्तरी शहर इर्बिड में भी बुधवार को राजनीतिक सुधार और भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

बढ़ती गरीबी, लोक उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्र्दशनकारियों में व्यापारिक संगठन, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और महिला संगठन शामिल हैं।

गौरतलब है कि मध्य-पूर्व के देशों में सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार में शामिल होने और आर्थिक संकट की वजह से बढ़ते असंतोष के कारण जन आंदोलन की लहर तेज होती जा रही है।

मिस्र में जनाक्रोश के कारण पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के पतन और ट्यूनीशिया के पूर्व राष्ट्रपति जिन अल आबिदीन बेन अली के देश छोड़ने से अब्दुल्ला भी अपनी सत्ता बरकरार रखने को लेकर बेहद आशंकित हैं।

प्रदर्शनकारी वर्ष 1952 में निर्मित संविधान में भी बदलाव चाहते हैं जिसमें प्रधानमंत्री को नियुक्त करने और बर्खास्त करने के बनिस्पत शाह को अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की गई हैं।

शाह को इसके पहले भी आर्थिक नीतियों और देश में राजनीतिक हालातों को लेकर सरकार विरोधी रैलियों का सामना करना पड़ा है।

इस बीच, कबायली लोगों ने अपनी कृषि योग्य भूमि वापस मांगनी शुरू कर दी है जिसे सरकार ने 1980 के दशक में जर्बदस्ती अधिग्रहित कर लिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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