अमेरिका में 3 छात्रों का रेडियो टैग हटाया गया (लीड-1)
वाशिंगटन, 17 फरवरी (आईएएनएस)। एक बोगस अमेरिकी विश्वविद्यालय के बंद होने से प्रभावित हुए भारतीय छात्रों के मसले में सहयोग के अमेरिकी आश्वासन के बाद यहां अधिकारियों ने तीन छात्रों को रेडियो टैग से मुक्त कर दिया है।
अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) कार्यालय ने बुधवार को तीन और छात्रों के पैर से रेडियो टैग हटाने के साथ कुल 18 छात्रों में से पांच को रेडियो टैग से मुक्त कर दिया है। दरअसल कैलीफोर्निया स्थित ट्राई-वैली बोगस विश्वविद्यालय के बंद होने के बाद इन छात्रों को वीजा धोखाधड़ी के आरोप में अपने पैर में रेडियो टैग पहनने के लिए मजबूर किया गया था।
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि आईसीई ने इन पांचों छात्रों के पासपोर्ट भी लौटा दिए हैं। दो प्रवासी अधिकारियों कल्पना पेडीभोटला और मनप्रीत गहरा ने आईसीई को ये पासपोर्ट सौंपे थे।
उन्होंने बताया कि इस सकारात्मक बदलाव से उत्साहित दोनों प्रवासी अधिकारी अगले सप्ताह 10 और छात्रों को आईसीई ले जाएंगे। दोनों अधिकारियों को इन छात्रों के मामले में भी आईसीई के सकारात्मक रुख की उम्मीद है।
दक्षिण एशियाई बार एसोसिएशन के इन दोनों प्रवासी अधिकारियों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास के सहयोग से ट्राई-वैली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए सान फ्रांसिस्को में एक मुफ्त कानूनी सहायता शिविर खोला है।
इस बीच ट्राई-वैली विश्वविद्यालय के बंद हो जाने से प्रभावित हुए भारतीय छात्रों के मसले को सुलझाने के लिए अमेरिका ने भारत के साथ पूरा सहयोग करने का वादा किया है लेकिन उसने कहा है कि अभी यह कहना बहुत मुश्किल है कि मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी क्योंकि पूरी जांच लंबित है।
विदेश विभाग के प्रवक्ता पी.जे. क्राउले से जब बुधवार को संवाददाताओं ने प्रभावित छात्रों के भविष्य को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है।
ट्राई-वैली विश्वविद्यालय में करीब 1,555 छात्र थे। इनमें से 90 प्रतिशत छात्र भारतीय हैं और उनमें ज्यादातर आंध्र प्रदेश से हैं। उनके छात्र वीजा को मान्य बनाए रखने के लिए जब तक उन्हें अन्य संस्थानों में प्रवेश नहीं मिल जाता तब तक उनके निर्वासन का खतरा बना रहेगा।
उन्होंने कहा, "अमेरिका इस दिशा में सहयोगात्मक रवैया रखेगा, हम भारत सरकार के साथ हैं और इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं लेकिन अभी यह कहना मुश्किल है कि इस मामले में क्या किया जा सकता है क्योंकि अभी मामले की जांच चल रही है।"
इस मामले को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के समक्ष उठाया गया था और भारत स्थित अमेरिकी दूतावास व अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास में भी इस पर चर्चा हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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