चाहिए प्रसन्नता तो बढ़िए लक्ष्य की ओर
जोगिन्दर सिंह
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। प्रसन्नता पाने की इच्छा सबके मन में रहती है। अमेरिका में स्वतंत्रता की घोषणा में कहा गया कि खुशी और आजादी पाना हर व्यक्ति का अधिकार है। हर धर्म व दर्शन प्रसन्नता तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है। मैं किसी भी एक धर्म की बात नहीं कर रहा, लेकिन किसी धर्म के नियमों पर चलकर आपको खुशी मिलती है तो उसका पालन अवश्य करें।
कोई चाहे कुछ भी कहे, असली प्रसन्नता आपके उद्देश्य में छिपी है। यह उद्देश्य आपके पूरे जीवन को प्रभावित करते हैं। अगर आपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लिए लक्ष्य नहीं बनाए हैं तो आपको इस दिशा में सोचना चाहिए।
बाहरी परिस्थितियों व उनसे निपटने के तरीके पर प्रसन्नता निर्भर करती है। विशेष लक्ष्यों की ओर बढ़ने से प्रसन्नता का स्तर भी बढ़ता है। हमें अपने लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट होना चाहिए। लक्ष्य बनाए बिना तो एक कदम भी चलना कठिन होता है। फिर आपको उन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए समय सीमा तय करनी चाहिए। फिर योजना पर काम शुरू कर दें और जहां आवश्यकता हो, वहां बदलाव लाएं। जैसे-जैसे आप लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, प्रसन्नता बढ़ती चली जाएगी।
आपने नोट किया होगा कि जब लोग कोई परीक्षा पास करके अगली कक्षा में जाते हैं या सिविल सर्विस की परीक्षा देकर सर्विस में आते हैं तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता। मुझे आज भी याद है कि 27 मई, 1961 को जब मुझे आई.पी.एस. के लिए चुन लिया गया था तो मैं कितना गर्वित और प्रसन्न था।
लक्ष्य तक पहुंच न पाना, ईष्र्या, उदासी, थकान, अकेलापन, संबंधों की परेशानियां तथा दूसरों की नजर में बुरा बनने का भय आदि प्रसन्नता की राह में बाधा बन जाते हैं।
प्रसन्नता पाने के लिए अच्छी सेहत, तयशुदा लक्ष्य, स्वस्थ सम्बंध, पर्याप्त कमाई, पारिवारिक स्नेह, उत्पादक कार्य और सकारात्मक रवैए का होना जरूरी होता है।
मेरी राय में अच्छी सेहत का मतलब है कि शरीर में कोई रोग न हो। इससे जीवन में जोश आता है और जीने का मजा दोगुना हो जाता है। अच्छी सेहत का मतलब यह नहीं होता कि आपकी सेहत किसी ओलंपिक खिलाड़ी की तरह बढ़िया हो जाए। खांसी, जुकाम या बुखार आदि छोटी-मोटी परेशानी का अर्थ यह नहीं होता कि हम सेहतमंद नहीं हैं। ये अस्थायी परेशानियां अपने आप हल हो जाती हैं।
अच्छी सेहत के बिना हम न तो जीवन में कुछ पा सकते हैं और न ही आजीविका कमा सकते हैं। एक सकारात्मक रवैया, घटनाओं व हालात के प्रति सहज भाव और लोगों के बारे में अच्छी राय हमारी प्रसन्नता को नजदीक ले आते हैं। हमें बात-बात पर निराश होने की आदत भी छोड़ देनी चाहिए। ये तथ्य आपकी प्रसन्नता के स्तर को ऊंचा कर सकते हैं :
1.उत्सुकता, आवेग, जोश
2.पसंदीदा काम
3.अवैयक्तिक पहुंच
4.कड़ी मेहनत
प्रसन्न रहने का चुनाव हर व्यक्ति स्वयं ही करता है। बर्टेड रसेल के अनुसार "प्रसन्नता का रहस्य है, अपनी रुचियों का क्षेत्र विस्तृत करो, अपने संपर्क में आने वाली वस्तुओं व अंगों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को मित्रवत बना लो।"
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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