लाली को क्यों हटाना चाहती है सरकार : सर्वोच्च न्यायालय (लीड-1)
अदालत का यह निर्देश केंद्र सरकार के यह कहने पर आया है कि वह लाली को हटाना चाहती है।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.एच.कपाड़िया, न्यायमूर्ति के.एस.राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को लाली को हटाए जाने की वजह बताते हुए तथ्यों के साथ जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
अदालत ने सरकार से कहा कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी लाली द्वारा की गई अनियमितताओं का ब्योरा तथ्यों के साथ पेश करे और उन पर लगे आरोपों के समर्थन में सबूत दे।
अदालत ने सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने के बाद लाली को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय भी निर्धारित कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश तब दिया है, जब केंद्र ने लाली को हटाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से उसकी राय मांगी।
अतिरिक्त महाधिवक्ता मोहन जैन अदालत में सरकार की ओर से पेश हुए।
लाली की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता के.के.वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि उनका मुवक्किल इस वर्ष सेवानिवृत्त हो रहा है और पद छोड़ने से पहले वह अपने नाम से जुड़े किसी भी आरोप को समाप्त करना चाहता है।
लाली के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं और 29 दिसम्बर, 2010 को उन्हें निलम्बित कर दिया गया था।
राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में बरती गई अनियमितता की जांच के लिए गठित शुंगलू समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रसार भारती ने दिल्ली में अक्टूबर 2010 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के प्रसारण के लिए भारी-भरकम बिल को मंजूरी दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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