प्रधानमंत्री से आश्वासन मिलने पर चौहान ने अनशन तोड़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें 20 फरवरी को योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से मुलाकात के लिए दिल्ली बुलाया है।
बीएचईएल दशहरा मैदान पर शुरू हुए अनशन के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं से कहा, "मेरे अनशन पर बैठने का फैसला बड़ा कदम था। इंदिरा आवास से लेकर कोयला वितरण, खाद्यान्न, सड़क और किसानों के लिए राहत पैकेज जैसे सभी मामलों में केंद्र सरकार ने प्रदेश के साथ अन्याय किया है।"
उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार ने किसानों की राहत के लिए एक रुपये की अतिरिक्त राशि नहीं दी है। 200 करोड़ रुपये और 224 करोड़ रुपये की राशि प्रदेश के लिए पहले ही मंजूर राशि में से दी गई है।"
उन्होंने कहा, "मैंने अनशन पर बैठने का फैसला किया क्योंकि यह लोकतंत्र का सबसे बेहतर तरीका है।"
चौहान ने कहा, "रविवार को राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने मुझे बुलाया था। वहां से लौटते वक्त प्रधानमंत्री का फोन आया। उन्होंने कहा कि वह मेरे बड़े भाई समान हैं और उन्हें मेरे स्वास्थ्य की चिंता है। मैंने उनसे कहा कि मैं अपने लिए काम नहीं करता बल्कि प्रदेश की जनता के लिए काम करता हूं।"
चौहान ने कहा, "इसके बाद प्रधानमंत्री ने मुझे आश्वासन दिया कि वह इस मामले को देखेंगे और अहलूवािलया से भी इस पर गौर करने को कहेंगे।"
बकौल चौहान, "प्रधानमंत्री ने मुझसे लगभग 10 मिनट बात की और अहलूवालिया से बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया।"
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्र से बातचीत के बाद राज्यपाल ने मुझसे कहा कि उपवास के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। मैंने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बात की है। उन्होंने भी मुझे सुझाव दिया है कि प्रधानमंत्री के आश्वसन को मान लूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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