प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा बढ़ाने की सिफारिश

मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस.वाई कुरैशी ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि आयोग ने लोकसभा चुनाव के लिए 40 लाख रुपये तथा विधानसभा चुनाव के लिए 16 लाख रुपये तक खर्च सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है, जबकि मौजूदा खर्च सीमा क्रमश: 25 एवं 10 लाख रुपये है।

उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता की पहचान के लिए राशन कार्ड को प्रमाण मानने की अनुमति दी जाएगी, तमिलनाडु में हालांकि 99 प्रतिशत मतदाताओं को मतदाता फोटो पहचान पत्र जारी किए गए हैं।

कुरैशी के अनुसार आयोग इस विकल्प पर भी विचार कर रही है कि मतदाताओं को पावती पत्र (एक्नॉलेजमेंट पेपर) मुहैया कराया जाए, ताकि वे जान सकें कि उन्होंने किसको मत दिया है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह सुविधा आगामी विधानसभा चुनावों में दे पाना संभव नहीं होगा।

उनहोंने कहा कि एक समिति इस मसले पर काम कर रही है। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

इससे पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास में 'चुनाव प्रक्रिया एवं राजनीतिक सुधार' विषय पर आयोजित 12वें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुरैशी ने कहा कि चुनाव पूर्व मत सर्वेक्षण मतदाताओं को संशय में डाल देता है, इसलिए इस पर रोक लगाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि जब पैसे देकर खबर छपाई जा सकती है तो पैसे देकर कुछ राजनीतिक दल अपने पक्ष में चुनाव पूर्व मत सर्वेक्षण भी करा सकते हैं।

कुरैशी ने कहा कि चुनाव से 48 घंटे पहले के समय को 'मौन अवधि' मानी जानी चाहिए, इसलिए घर-घर जाकर प्रचार करने से भी बचना चाहिए।

प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने श्रोताओं से कहा किसी पार्टी के खर्च की सीमा तय करने पर भी विचार किया जा रहा है।

उन्होंने मतदान को अनिवार्य बनाए जाने से इंकार किया और कहा कि यह लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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