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चाहते हैं कामयाबी तो अपनी कद्र करना न भूलें

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। हमें उन मानसिक बंधनों से ऊपर उठने की कोशिश करनी चाहिए जो हमें कोई भी नया काम करने से रोक देते हैं। पूरी ईमानदारी से अपना विश्लेषण करें तो आप आसानी से अपने भय, निराशा और संदेह पर काबू पा सकते हैं। आपको जानने की कोशिश करनी होगी कि आप अपने सपनों को साकार क्यों नहीं कर पा रहे हैं, कहीं आपको अपने सहकर्मियों के उपहास का भय तो नहीं?

हो सकता है कि आप अपने आरामदेह वर्तमान से बिछड़ने से डरते हों या किसी अन्य स्थान पर जाने का भय सताता हो। एक कारण यह भी हो सकता है कि आप अपने लिए वो नहीं चाहते जो परिवार व मित्रों ने आपके लिए सोच रखा है। एक बार सही और असली वजह जानने के बाद झूठे भय पर काबू पाकर सही मुद्दे पर ध्यान जमाया जा सकता है।

सफलता व प्रसन्नता की यात्रा यहीं से शुरू होती है, क्योंकि आप आगे बढ़ने का साहस संजो लेते हैं। इस प्रेरणा से आप एक सपना साकार करने के बाद दूसरे के लिए काम करने लग जाते हैं। वैसे इसमें कोई बुराई भी नहीं है, सभी व्यवसाय और वाणिज्य इसी प्रेरणा से ही फलते-फूलते हैं। यही विकास का विज्ञान है।

जोनाथन वेस्टोवर कहते हैं- "चाहे हम नया खेत जोतें या खरपतवार उगने दें, चुनाव हमारा ही होता है।"

कौन आपको पीछे धकेल रहा है? जीवन में प्रसन्नता, सफलता व संतुष्टि पाने के लिए सबसे पहले उन रुकावटों पर ध्यान दें जो आपके कायाकल्प में बाधा देती हैं। किसी भी चुनौती का सामना होने पर पछतावा करने या घबराने की बजाय पूरे साहस व सकारात्मकता से उसका मुकाबला करें।

हमेशा अपने दिमाग में बिठाए रखें कि आप अपना सपना साकार कर सकते हैं। मगर केवल सोचना ही काफी नहीं है। उस काम को करने की पूरी योजना बनाकर सुनिश्चित रूप से काम शुरू कर दें। यह ठीक है कि आप एकदम अपनी विचारधारा नहीं बदल सकते, लेकिन एक दिन में एक विचार पर तो काम हो ही सकता है। अपने जीवन में उदासी के सबसे बड़े कारण को पहचान कर उस पर अभी से काम करना शुरू कर दें।

अपने झूठे विश्वासों को तोड़ना थोड़ा कठिन होता है। कभी भी अपनी खुशी को किसी समान, विजय या पैसे से न जोड़ें। सेहतमंद और अमीर होना अच्छी बात है लेकिन साथ ही आप जो भी हों, अपनी कद्र करना न भूलें।

जब तक आपको अपनी उदासी की असली वजह न मिल जाए, हिम्मत न हारें। अपने आपसे इस बारे में सवाल-जबाव करते ही आपके जीवन में बदलाव आने लगेगा। अपने आपसे कभी न कहें कि आपको कभी खुशी नहीं मिल सकती। अपने आपसे पूरी उम्मीदें रखें और असफलता के लिए अपने आपको न कोसें।

कई लोग अपने जीवन को माता-पिता या मित्रों की उम्मीदों से जोड़ लेते हैं और दुख पाते हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मेरे माता-पिता मुझे डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहते थे। जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया तो चीरफाड़ वाला विषय मेरी रुचि से मेल नहीं खाता था। मैंने माता-पिता की खुशी के लिए वे विषय लिए थे।

अब दो ही विकल्प थे कि या तो मैं उन विषयों को छोड़ दूं या फेल हो जाऊं। तब मैंने आर्ट्स में दाखिला ले लिया और आईपीसी में भर्ती होकर सीबीआई के निदेशक पद पर पहुंचा। आपको अपने डर, संकोच व संदेह के पीछे छिपे कारण को अवश्य तलाशना चाहिए। सफलता पाने के लिए ऐसा ही कॅरियर चुनें जो आपको सबसे ज्यादा भाए। इसी तरह आप प्रसन्नता पा सकते हैं।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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