'मुबारक ने सद्दाम को हटाने से अमेरिका को मना किया था'
समाचार पत्र 'द टेलीग्राफ' ने विकिलीक्स के हवाले से कहा है कि मुबारक ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी बात नहीं मानी गई और इराक पर हमला किया गया तो अमेरिकियों को ईरान से खतरा बढ़ जाएगा। अखबार के अनुसार मुबारक ने यह सुझाव काहिरा में दिसम्बर 2008 में अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधियों के साथ नाश्ते पर हुई एक मुलाकात के दौरान दिया था।
मुबारक ने कांग्रेस के एक प्रतिनिधि, सेन बाइरॉन डॉर्गन से कहा था कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपने मित्रों की बात माननी चाहिए।
14 जनवरी, 2009 को भेजे गए एक अमेरिकी संदेश के अनुसार मुबारक ने कहा था, "जब जॉर्ज बुश सीनियर राष्ट्रपति थे, तो उन्होंने मेरी सलाह मानी थी। लेकिन उनके बेटे मेरी सलाह नहीं मानते।"
संदेश में कहा गया है, "मुबारक ने कहा कि जब राष्ट्रपति बुश सीनियर ने पूछा था कि प्रथम खाड़ी युद्ध के दौरान सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए इराक पर हमला करने के बारे में मुबारक का क्या विचार है, तो मुबारक ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि 'आप इराक से बाहर नहीं निकल पाएंगे और आप वहीं डूब जाएंगे'।"
मुबारक ने कहा था कि यही बात उन्होंने मौजूदा प्रशासन को भी समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।
संदेश के अनुसार मुबारक ने कहा था, "मैंने उप राष्ट्रपति चेनी से तीन चार बार कहा कि इराक को एक मजबूत नेता की जरूरत है और इस लिहाज से सद्दाम हुसैन को हटाना नासमझी होगी। ऐसा करने से ईरान के लिए दरवाजा खुल जाएगा। लेकिन दुर्भाग्यवश उप राष्ट्रपति ने उनकी सलाह नहीं मानी।"
संदेश में आगे लिखा हुआ है, "इन गलतियों के जरिए अमेरिका ने ईरान को सशक्त किया है। मुबारक के अनुसार ईरान का मकसद पूरे क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है। मुबारक ने कहा था कि ईरान खाली जगह को भरने के लिए अमेरिका के इराक छोड़ने का इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही मुबारक ने कहा था कि ईरान हिज्बुल्ला, हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे क्षेत्र के कई चरमपंथी संगठनों के लिए कोष का स्रोत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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