मुबारक के भविष्य पर फैसला के लिए सेना की बैठक (लीड-2)
समाचार चैनल 'अल जजीरा' के मुताबिक देशव्यापी प्रदर्शन को देखते हुए मुबारक के भविष्य का फैसला करने के लिए सेना की सर्वोच्च परिषद बैठक कर रही है। सेना ने कहा है कि वह हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
मुबारक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कई सुधारों और सत्ता हस्तांतरण के लिए संविधान की समीक्षा के लिए समिति गठित करने के बावजूद प्रदर्शनकारी मुबारक के इस्तीफे से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।
राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर पिछले 17 दिनों से डटे हजारों प्रदर्शनकारियों को जहां बुधवार को श्रम संगठनों का समर्थन मिला वहीं अब उन्हें वकीलों, चिकित्साकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों का समर्थन भी मिलने लगा है। गुरुवार को चिकित्साकर्मियों ने काम छोड़कर प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
काहिरा के एक महत्वपूर्ण अस्पताल के करीब 3000 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए और उन्होंने काम छोड़कर प्रदर्शन में हिस्सा लिया जिसकी वजह से अस्पताल में कामकाज नहीं हो सका। मुबारक के इस्तीफे, राजनीतिक सुधारों और ज्यादा वेतन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन पिछले 25 जनवरी से निरंतर जारी है।
इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को एक बार फिर विशाल प्रदर्शन करने की घोषणा की। इससे पहले उन्होंने दो फरवरी को 10 लाख लोगों की रैली निकाली थी।
इस बीच न्यायिक समिति ने संविधान के छह अनुच्छेदों में संशोधन पर अपनी सहमति दी है जिसमें राष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि सीमित करने और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को तय करने के लिए योग्यता सूची को बढ़ाने की बात कही गई है लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मुबारक के इस्तीफे की मांग की है और उन्होंने साफ कर दिया है कि इसके अलावा वह किसी समझौते को नहीं मानेंगे।
हजारों लोग पिछले 17 दिनों काहिरा के तहरीर चौक पर दिन-रात डटे हुए हैं। संसद की इमारत से कुछ ही दूर यह प्रदर्शनकारी शिविर लगाकर रातें बिता रहे हैं। प्रदर्शनकारी सरकार द्वारा हाल ही में किए गए सुधार के वादों से संतुष्ट नहीं हैं।
देश में हालात सामान्य बनाने की कोशिशों के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने उपराष्ट्रपति की उस चेतावनी को दरकिनार किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि विपक्षी दलों से वार्ता असफल होती है तो तख्तापलट होने का खतरा है।
विपक्षी पार्टी 'मुस्लिम ब्रदरहुड' ने हाल ही में कहा था कि सरकार के साथ बातचीत अनिर्णीत रही है और इसे स्थगित रखा गया है।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 25 जनवरी के बाद से चल रहे विरोध प्रदर्शनों में देश में अब तक 300 लोगों की मौत हो चुकी है।
बुधवार को करीब 3,000 रेलवे कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। प्रदर्शनकारियों ने काहिरा में शुक्रवार को एक बार फिर दस लाख लोगों का जुलूस निकालने की घोषणा की है।
उधर अमेरिका ने कहा कि मिस्र की सरकार सत्ता परिवर्तन के लिए तत्काल और स्थायी कार्रवाई करे।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जो बिडेन ने मिस्र के उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान से बुधवार को बातचीत में कहा था कि मिस्र सरकार पिछले 30 साल से लागू आपातकालीन कानूनों को फौरन हटाए और पत्रकारों और नागरिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को पीटना और गिरफ्तार करना बंद करे।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने संकटग्रस्त मिस्र में 'चरणबद्ध और शांतिपूर्ण' परिवर्तन की अपील की है।
उन्होंने आशा जताई की नेताओं और लोगों के बीच वास्तविक बातचीत से इस प्रक्रिया की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि मिस्र में चरणबद्ध और शांतिपूर्ण परिवर्तन महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, "इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के तरीके और उनके देश का भविष्य निश्चित तौर पर वहां के लोगों को ही तय करना है। संयुक्त राष्ट्र उनको किसी भी तरह का समर्थन मुहैया कराने के लिए तैयार है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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