आंध्र प्रदेश: चिरंजीवी की पार्टी का कांग्रेस में विलय, जगन को झटका

नई दिल्ली/हैदराबाद। आंध्र प्रदेश में वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद आया राजनीतिक भूचाल पिछले पूरे साल प्रदेश की स्थिरता में विघ्न पैदा करता रहा। राजशेखर रेड्डी का बेटे जगनमोहन रेड्डी ने प्रदेश को संभालने के लिए लाख जतन किए लेक्न कांग्रेस ने ऐसा नहीं होने दिया। हालांकि कांग्रेस पर खुद भी राज्य में अल्पमत में आना का खतरा बरकरार रहा। इसके बावजूद कांग्रेस ने जगनमोहन रेड्डी के सामने घुटने नहीं टेके।

रविवार को दक्षिण फिल्मों के प्रमुख अभिनेता चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) का कांग्रेस में विलय हो गया। अभिनेता से नेता बने के. चिरंजीवी ने साल 2008 में पीआरपी का गठन किया था। राज्य विधानसभा में पीआरपी के 18 सदस्य हैं। कांग्रेस की इस नई चाल से राज्य का राजनीतिक घटनाक्रम पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में हो गया है। राज्य में इस समय कांग्रेस की सरकार है, पीआरपी के कांग्रेस में विलय से कांग्रेस का सिक्का राज्य में पूरी तरह से जम गया है।

रविवार को चिरंजीवी सोनिया गांधी से मिले और उनसे इस विलय के बाबत गहन चर्चा भी की। चिंरजीवी ने कहा, "यह विलय बिना किसी शर्त पर आधारित है। मैं जो कुछ भी करता हूं वह जनता की भलाई के लिए करता हूं। मुझे करीब से जानने वाले इस बात को बखूबी समझेंगे।" हालांकि पी आरपी में अंदरूनी मतभेद की भी कुछ खबरें आ रही हैं लेकिन इस बाबत जब चिरंजीवी से पूछा गया तो उन्होने इंकार कर दिया। चिरंजीवी ने कहा "सामाजिक न्याय के लिए हमें एक बड़े प्लेटफार्म की जरूरत है। इसलिए कांग्रेस से हाथ मिलाने और साथ काम करने का यह उचित समय है।"

चिरंजीवी ने राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने की सम्भावनाओं को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, "मैं किसी पद की उम्मीद नहीं रखता। यह कांग्रेस का काम है। मैं सरकार में भी शामिल नहीं हो रहा हूं। आज का दिन ऐतिहासिक है।" कांग्रेस के राज्य पदाधिकारियों ने चिरंजीवी के पार्टी में विलय होने का स्वागत किया है और कहाकि वह आत से कांग्रेस परिवार के सदस्य हैं।

उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद उनके बेटे वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी द्वारा कांग्रेस पार्टी छोड़ देने से राज्य में कांग्रेस की स्थिति अब उतनी मजबूत नहीं रही जितना पहले हुआ करती थी। जगन की चुनौती का सामना कर ही रही कांग्रेस पर ऊपर से अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर भी उसके तेलंगाना क्षेत्र के नेताओं का जबरदस्त दबाव है।

ज्ञात हो कि चिरंजीवी संयुक्त आंध्र प्रदेश की वकालत और पृथक तेलंगाना राज्य की मुखालफत करते रहे हैं। ऐसे में उनके कांग्रेस में विलय से तेलंगाना क्षेत्र में कांग्रेस के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है। वैसे इस विलय के मुख्य नायक ए के एंटनी हैं जिन्होने अपने हालिया दौरे के दौरान चिरंजीवी से मिल कर पीआरपी के कांग्रेस में विलय की पटकथा तैयार की थी। उधर जगन समर्थकों ने कहा कि निजी हित को साधने के लिए चिरंजीवी ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कराया है।

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