'अव्यवस्थित जीवनशैली से महिलाओं में बांझपन'

नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। बदलती जीवनशैली, धूम्रपान, अनियमित काम की दिनचर्या और जीवनशैली से सम्बंधित अन्य विकार महिलाओं में बांझपन के कारण हैं। यह बात स्त्रीरोग विशेषज्ञों के एक सम्मेलन में कही गई।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 'इनविट्रो ह्युमन फर्टिलाइजेशन' (आईवीएफ) की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर सर गंगा राम अस्पताल के आईवीएफ केंद्र की निदेशक आभा मजूमदार ने कहा, "महिलाएं आज एक आपाधापी वाली जीवनशैली अपना रही हैं।"

उन्होंने कहा, "इसकी वजह से उनका मासिक चक्र और उनकी हार्मोनल आपूर्ति नहीं हो पाती है और वे बांझपन का शिकार हो जाती हैं।"

उन्होंने कहा, "देर से विवाह करना खासकर 30 वर्षो के बाद बांझपन का एक अन्य कारण है। करीब छह से आठ प्रतिशत जोड़े बांझपन से प्रभावित हैं।"

एम्स के प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष सुनीता मित्तल ने कहा, "बांझपन से जीवन को खतरा नहीं समझा जाता है, लेकिन इस पर ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि इस रोग पर काफी तरक्की कर ली गई है।"

मजूमदार ने बताया कि बांझपन को लेकर जोड़ों में गलत अवधारणाएं हैं। इसलिए वे इस बारे में नीम हकीमों से राय लेते हैं। जब देश में उन्नत आईवीएफ इकाइयां मौजूद हैं तो उन्हें लोकप्रिय करने की जरूरत है।"

उल्लेखनीय है कि विचार गोष्ठी में देश और विदेश के 100 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए जबकि 1900 से अधिक जोड़ों ने इस गोष्ठी का लाभ उठाया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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