पितृत्व मामला : तिवारी को डीएनए जांच के लिए मिला 1 दिन (लीड-1)

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने तिवारी के सहयोगी को मंगलवार को संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष पेश होने तथा परीक्षण की सभी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा है। अदालत ने तब तक के लिए डीएनए परीक्षण के खिलाफ दायर तिवारी की याचिका पर आदेश सुरक्षित कर लिया है।

गौरतलब है कि 31 वर्षीय रोहित शेखर ने दावा किया है कि वह तिवारी के पुत्र हैं। उनका जन्म उनकी मां उज्ज्वला शर्मा एवं तिवारी के बीच कथित सम्बंधों का सबूत है।

तिवारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत भूषण ने 23 दिसम्बर, 2010 के उस आदेश पर अंतरिम रोक की मांग की थी जिसमें तिवारी का डीएनए परीक्षण कराने को कहा गया था।

भूषण ने कहा, "यह आवश्यक नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता (रोहित) ने किसी आर्थिक राहत की मांग नहीं की है।"

खंडपीठ ने कहा, "क्या तिवारी यह हलफनामा पेश कर सकते हैं कि वह अगले 10 वर्ष तक जीवित रहेंगे?"

भूषण ने कहा, "अदालत तिवारी को इसके लिए बाध्य नहीं कर सकती कि वह अपने रक्त का नमूना दें। ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसले विद्यमान हैं।"

अविभाजित उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहे तिवारी ने डीएनए परीक्षण का विरोध किया है।

ज्ञात हो कि यौन कदाचार का आरोप लगने के बाद तिवारी को पिछले वर्ष आंध्र प्रदेश के राज्यपाल पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

तिवारी ने दावा किया है कि उज्ज्वला के साथ कभी भी उनका सम्बंध नहीं रहा। उन्होंने कहा कि रोहित डीएनए परीक्षण की मांग करने का अधिकारी नहीं है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसम्बर को तिवारी को आदेश दिया था कि वह डीएनए परीक्षण कराकर शेखर के दावे को स्पष्ट करें।

न्यायमूर्ति एस.रवींद्र भट्ट की एकल पीठ ने कहा, "अपने पिता के बारे में जानने के किसी बच्चे के अधिकार को दरकिनार नहीं किया जा सकता।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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