21वीं सदी संवाद की सदी हो : दलाई लामा
गोवा सरकार द्वारा प्रायोजित व्याख्यानमाला में उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की कोई भी समस्या संवाद से हल की जा सकती है।
नोबेल पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने कहा कि 20वीं सदी युद्ध और खूंरेजी की सदी थी। इस सदी को निश्चित रूप से संवाद की सदी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत हजारों वर्षो से अहिंसा और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश वाहक रहा है। यह अपने आप में दुनिया के लिए एक संदेश है।
उन्होंने कहा कि धर्म और धार्मिक मुद्दों से लगाव सांप्रदायिक वैमनस्य का मुख्य कारण है।
उन्होंने कहा कि खुद उन्हें बौद्ध धर्म से अत्यधिक लगाव नहीं रखना चाहिए। यदि वे लगाव रखते हैं, तो वे कट्टरपंथी हो जाएंगे। अत्यधिक लगाव से कट्टरपंथ पैदा होता है।
दलाई लामा 1959 से भारत में रह रहे हैं। धर्मशाला में उन्होंने तिब्बत की निर्वासित सरकार बनाई है, जिसे किसी भी देश की मान्यता नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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