मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर 8.6 फीसदी रहेगी (लीड-1)
केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन ने सोमवार को विकास के नए अनुमान जारी करते हुए कहा कि इस कारोबारी साल में सेवा क्षेत्र में 11 फीसदी, कृषि क्षेत्र में 5.4 फीसदी और उद्योग में 8.8 फीसदी की विकास दर रहेगी।
संगठन का 8.6 फीसदी विकास दर का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 8.5 फीसदी विकास दर के अनुमान से अधिक है।
मुख्य सांख्यिकीविद् टी. सी. ए. अनंत ने संवाददाताओं से कहा कि कारोबारी साल की पहली छमाही की 8.9 फीसदी विकास दर के तात्कालिक अनुमान में सुधार करते हुए इसे कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल की अनुमानित विकास दर के आधार पर इस साल की पहली छमाही की विकास दर की गणना की गई थी। अब पिछले साल की विकास दर जारी हो गई है और यह पिछले साल के अनुमान से अधिक है। इसलिए पिछले साल की अधिक विकास दर के आधार पर गणना करने पर इस कारोबारी साल की पहली छमाही की विकास दर में कमी आएगी। यह दर 8.5-8.6 फीसदी पर ठहर सकती है।
सांख्यिकीय संगठन द्वारा हाल में जारी राष्ट्रीय आय के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर को 7.4 फीसदी से बढ़ाकर आठ फीसदी किया गया है।
संगठन द्वारा जारी नए अनुमान के मुताबिक इस कारोबारी साल कृषि, वानिकी और मत्स्यपालन में 5.4 फीसदी विकास होगा। यह दर पिछले साल 0.4 फीसदी थी।
व्यापार, होटल, परिवहन और संचार वाले सेवा क्षेत्र में 11 फीसदी के विकास का अनुमान है। वित्त, बीमा, रियल एस्टेट और व्यापार सेवाओं में 10.6 फीसदी विकास होने का अनुमान है।
निर्माण क्षेत्र की विकास दर 8.8 फीसदी रहने और खनन में 6.2 फीसदी की दर से विकास होने की सम्भावना जताई गई है।
संगठन ने प्रति व्यक्ति आय के इस साल बढ़कर 36,003 रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है, जो पिछले साल 33,731 रुपये थी। प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की दर 6.7 फीसदी रहने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष 6.1 फीसदी थी।
विभिन्न क्षेत्रों में अनुमानित विकास दर निम्नलिखित रहने की उम्मीद है। पिछले साल के आंकड़े कोष्ठक में हैं-
कृषि- 5.4 फीसदी (पिछले वर्ष 0.4 फीसदी)
खनन और उत्खनन - 6.2 फीसदी (पिछले वर्ष 6.9 फीसदी)
विनिर्माण - 8.8 फीसदी (पिछले वर्ष 8.8 फीसदी)
बिजली, गैस और जलापूर्ति - 5.1 फीसदी (पिछले वर्ष 6.4 फीसदी)
निर्माण - 8 फीसदी (पिछले वर्ष 7 फीसदी)
व्यापार, होटल, परिवहन-11 फीसदी (पिछले वर्ष 9.7 फीसदी)
वित्त, बीमा, रियल एस्टेट और व्यापार सेवा - 10.6 फीसदी (पिछले वर्ष 9.2 फीसदी)
सामुदायिक, सामाजिक और निजी सेवा - 5.7 फीसदी (पिछले वर्ष 11.8 फीसदी)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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