खनाल 24 मई को पद छोड़ने को तैयार : रिपोर्ट
काठमांडू, 7 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल में सात महीने के राजनीतिक गतिरोध के बाद नए प्रधानमंत्री के निर्वाचन से भी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। अलबत्ता नए प्रधानमंत्री का चुनाव नई परेशानी का सबब बन गया है। सत्ताधारी पार्टी और माओवादियों के बीच एक गुप्त समझौता होने की रपट है।
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल)के अध्यक्ष झलनाथ खनाल ने रविवार को प्रधानमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ तो ले ली, लेकिन नए सहयोगी, माओवादियों के साथ सत्ता बंटवारे को लेकर उपजे विवाद के कारण वह कैबिनेट की घोषणा नहीं कर पाए। अब खनाल के सामने नई समस्या आ खड़ी हुई है।
यही नहीं, एक रपट में कहा गया है कि खनाल (61) ने 24 मई को पद छोड़ देने का भी वादा किया है। पिछले सप्ताह के प्रधानमंत्री चुनाव में माओवादियों का समर्थन हासिल करने के लिए उनके साथ किए एक गुप्त समझौते को लेकर खनाल को अपनी पार्टी के भीतर तथा अन्य प्रमुख पार्टियों के कोप का भाजन बनना पड़ रहा है।
नेपाल के एक वित्तीय अखबार, 'आर्थिक अभियान' ने सोमवार को अपने मुख पृष्ठ पर प्रकाशित रपट में कहा है, "खनाल और माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड, दोनों इस बात को महसूस करते हैं कि वे 28 मई तक नया संविधान तैयार नहीं करा पाएंगे।"
अखबार ने अज्ञात राजनीतिक सूत्रों के हवाले से कहा है, "चूंकि वे नया संविधान लागू नहीं कर सकते, लिहाजा खनाल 24 मई को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। दोनों नेता इस बात पर राजी हैं कि खनाल के पद छोड़ने के बाद दहाल कम्युनिस्टों के समर्थन से नए प्रधानमंत्री बन जाएंगे।"
अखबार ने लिखा है, "इसीलिए दोनों ने एक गुप्त समझौते पर हस्ताक्षर किया कि बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व किया जाएगा।"
सोमवार की यह रपट, खनाल के निर्वाचन के तत्काल बाद हुए इस खुलासे के बाद प्रकाश में आई है कि खनाल ने खुद की अपनी ही पार्टी को अंधेरे में रख कर माओवादियों के साथ सात सूत्री समझौता किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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