भारत यात्रा न्यास की भूमि के दुरुपयोग से नीरज शेखर का इंकार

नीरज शेखर ने आईएएनएस को बताया कि कई राज्यों में स्थित न्यास की सैकड़ों एकड़ भूमि को बेचने की कोई कोशिश नहीं की गई है।

नीरज शेखर उस रपट पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसमें कहा गया है कि भारत यात्रा न्यास के न्यासी, अपने कुछ साथियों के उस कथित कदम को लेकर परेशान हैं, जिसके तहत न्यास की भूमि निजी समूहों को पट्टा देने की कोशिश की गई है।

उन्होंने कहा, "इन भूखण्डों को किसी भी रूप में निजी समूहों को देने का सवाल नहीं पैदा होता।"

नीरज शेखर ने कहा कि न्यास की भूमि का उपयोग केवल शैक्षणिक या तकनीकी संस्थान या फिर अस्पताल व मेडिकल कॉलेज स्थापित करने में किया जा सकता है।

न्यास के पास देश भर में 13 प्रमुख स्थानों पर सैकड़ों एकड़ जमीन है। जिन राज्यों में न्यास की जमीन है, उनमें केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से फोन पर नीरज शेखर ने बताया कि इस न्यास की स्थापना उनके पिता ने 1983 में कन्याकुमारी से राजघाट (नई दिल्ली) की 4,260 किलोमीटर लम्बी 'भारत यात्रा' पूरी करने के बाद की थी।

चंद्रशेखर ने 170 दिनों की पद यात्रा पूरी करने के बाद समाजवादी विचारधारा के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए केंद्र स्थापित किया था।

न्यास की भूमि के दुरुपयोग करने की कथित कोशिश को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ, जब समाजवादी नेता मोहन धारिया ने कथित रूप से न्यासियों को पत्र लिखा।

धारिया ने आरोप लगाया था कि न्यास की जमीन को निजी समूहों को पट्टा करने के लिए उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।

नीरज शेखर ने कहा कि "इस तरह का विचार हमारे (न्यासियों के) दिमाग में प्रवेश तक नहीं कर सकता।" उन्होंने कहा, "हमने धारियाजी से मुलाकात की थी, और अन्य न्यासियों के साथ उनसे दोबारा मिलने वाले हैं ताकि पैदा हुई गलतफहमियां दूर की जा सकें।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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