डॉक्टरेट की उपाधि मामले पर विवाद में घिरे भारद्वाज
बेंगलुरू, 6 फरवरी (आईएएनएस)। दक्षिणपंथी विचार रखने वाले एक कन्नड़ विद्वान को डॉक्टर की मानद उपाधि देने के बेंगलुरू विश्वविद्यालय के फैसले को स्वीकार न करने की वजह से कर्नाटक के राज्यपाल एच.आर. भारद्वाज विवाद में घिर गए हैं।
भारद्वाज ने रविवार को अपने फैसले को न्यायसंगत बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति एवं राज्य के प्रमुख होने के नाते वह इस 'दायित्व से बंधे हुए' हैं कि विवादों से बचने के लिए सम्मानित किए जाने वाले व्यक्ति का पूर्ववृत्त जांच लें।
ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता यू.आर. अनंतमूर्ति सहित कई प्रमुख कन्नड़ लेखकों ने एम. चिदानंद मूर्ति को डॉक्टर की मानद उपाधि देने के बेंगलुरू विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को स्वीकार न करने पर भारद्वाज की आलोचना की है। चिदानंद मूर्ति कन्नड़ भाषा एवं कर्नाटक के इतिहास पर शोध करने के कारण राज्य में प्रतिष्ठित हैं।
यहां शनिवार को आयोजित 77वें कन्नड़ साहित्य सम्मेलन में अनंतमूर्ति ने अपने संबोधन में कहा, "मैं मूर्ति के कई विचारों से सहमत नहीं हूं, लेकिन राज्यपाल का कदम न्यायसंगत और स्वीकार्य नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मेरी तीबयत ठीक नहीं है, फिर भी मैं राज्यपाल के निर्णय पर अपना विचार प्रकट करने यहां आया हूं।"
भारद्वाज ने हालांकि कहा, "मैं अपना काम कर रहा हूं।"
यहां आयोजित एक कार्यक्रम के बाद कन्नड़ लेखकों की आलोचनात्मक टिप्पणियोंपर उन्होंने संवाददाताओंे से कहा, "मैंने विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को रद्द नहीं किया है, बल्कि अस्थायी तौर पर स्वीकृति टाल दी है, क्योंकि सम्मानित किए जाने वाले सज्जन ने साम्प्रदायिक विचार प्रकट किए हैं।"
उल्लेखनीय है कि चिदानंद मूर्ति ने 2008 में कर्नाटक में चर्चो पर हुए सिलसिलेवार हमलों पर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा गठित न्यायिक समिति की हालिया रिपोर्ट का स्वागत किया है। उन्होंने ईसाई समूहों की कथित धर्मपरिवर्तन कराने की गतिविधियों के खिलाफ बयान दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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