चिरंजीवी ने पीआरपी के कांग्रेस में विलय की घोषणा की (लीड-1)
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश की राजनीति में रविवार को उस वक्त बड़ा मोड़ देखने को मिला जब अभिनेता से नेता बने के. चिरंजीवी ने 2008 में गठित अपनी प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) की कांग्रेस में विलय की घोषणा की।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद चिंरजीवी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "यह विलय बिना किसी शर्त पर आधारित है। मैं जो कुछ भी करता हूं वह जनता की भलाई के लिए करता हूं। मुझे करीब से जानने वाले इस बात को बखूबी समझेंगे।"
पीआरपी के एक वर्ग द्वारा पार्टी के कांग्रेस में विलय का विरोध करने और सिर्फ गठबंधन करने की वकालत करने के बारे में पूछे जाने पर चिरंजीवी ने कहा कि कोई विरोध नहीं है। "सामाजिक न्याय के लिए हमें एक बड़े प्लेटफार्म की जरूरत है। इसलिए कांग्रेस से हाथ मिलाने और साथ काम करने का उचित समय है।"
चिरंजीवी ने साथ ही राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने की सम्भावनाओं को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं किसी पद की उम्मीद नहीं रखता। यह कांग्रेस का काम है। मैं सरकार में भी शामिल नहीं हो रहा हूं। आज का दिन ऐतिहासिक है।"
केंद्रीय कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "पीआरपी का अब कांग्रेस में विलय हो गया है। चिरंजीवी अब कांग्रेस परिवार के सदस्य हैं।"
इस अवसर पर रक्षा मंत्री और कांग्रेस के आंध्र प्रदेश प्रभारी महासचिव ए. के. एंटनी ने कहा कि चिरंजीवी के कांग्रेस में शामिल होने से आंध्र प्रदेश में पार्टी की स्थिति मजबूत होगी।
उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद उनके बेटे वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी द्वारा कांग्रेस पार्टी छोड़ देने से राज्य में कांग्रेस की स्थिति डांवाडोल हो गई थी। ऊपर से अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर भी कांग्रेस पर उसके तेलंगाना क्षेत्र के नेताओं का जबरदस्त दबाव है।
एंटनी ने हाल ही में आंध्र प्रदेश का दौरा किया था और चिरंजीवी से मिलकर पीआरपी के कांग्रेस में विलय की पटकथा तैयार की थी।
उल्लेखनीय है कि चिरंजीवी ने 2008 में पीआरपी का गठन किया था और इसके गठन के छह महीने के भीतर हुए विधानसभा चुनाव में उसके 18 सदस्यों ने चुनाव जीता था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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