शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू करने की कवायद
देहरादून, 6 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तराखण्ड के हिमालय क्षेत्र में शीतकालीन चारधाम यात्रा शीघ्र शुरू करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए बदरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य और सभी धर्माचार्यो की स्वीकृति ली जा चुकी है।
विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर के देवताओं की मूर्तियों को शीतकाल में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मुखबा, खरसाली, पांडुकेश्वर और उखीमठ में रखा जाता है।
पिछले काफी समय से राज्य में इन शीतकालीन धामों में चारधाम यात्रा की तर्ज पर यात्रा शुरू करने की मांग की जा रही थी, क्योंकि कपाट बंद होने के बाद पर्यटन से आजीविका चला रहे लोग अपनी कारोबारी गतिविधियां समेटने को विवश हो जाते हैं।
गौरतलब है कि चारधाम के कपाट शीतकाल में बंद होने के कारण इन इलाकों में सैलानी नहीं आते हैं। इस कारण पर्यटन से अपनी आजीविका चला रहे हजारों लोगों के समक्ष आजीविका का संकट उत्पन्न हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने यह कवायद शुरू की है।
चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल ने रविवार को आईएएनएस को बताया कि शीतकाल में श्रद्धालुओं के लिए मुखबा, खरसाली, पांडुकेश्वर और उखीमठ में शीतकालीन चारधाम यात्रा शुरू की जाएगी।
उन्होंने बताया कि शीतकाल में पर्यटन को जारी रखने के लिए चारधाम की शीतकालीन गद्दियों और पहाड़ को मिले कुदरत के बेशुमार तोहफों से देश-दुनिया से अवगत कराने की तैयारियां चल रही हैं। इसके लिए बदरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य और सभी धर्माचार्यो की स्वीकृति ली जा चुकी है।
नौटियाल ने बताया कि जो प्राचीन परम्पराएं चली आ रही हैं, उन्हें अक्षुण्ण रखा जाएगा और इसमें कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस माह के अंतिम सप्ताह या मार्च की शुरुआत में शुभ ग्रह नक्षत्र के योग में यात्रा शुरू किए जाने की तिथि जल्द ही सुनिश्चित की जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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