क्रांति की इबारत लिखते 'चौक'

नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। मिस्र में तहरीर चौक पर सरकार विरोधी प्रदर्शन में पिछले 13 दिनों से हजारों लोग जुटे हुए हैं। इस दौरान सरकार व सरकार समर्थकों ने रक्तपात भी किए लेकिन उनके हौसले को डिगा नहीं पाए और वे सत्ता परिवर्तन की अपनी कामयाबी की इबारत लिखने के लिए अब भी संघर्ष कर रहे हैं। मिस्र के तहरीर चौक की तरह ही दुनिया में ऐसे कई और चौक हैं जिनसे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं चर्चित रहीं हैं।

सामान्यत: शहरों के मध्य में स्थित चौक का इस्तेमाल सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों को मूर्त रूप देने व अन्य व्यवसायिक इस्तेमालों के लिए किया जाता है लेकिन इतिहास के पन्नों को यदि पलटा जाए तो आप पाएंगे कि देश व दुनिया के प्रसिद्ध विभिन्न चौकों के पीछे क्रांति व आंदोलन की कोई न कोई कहानी छिपी हुई है।

ऐसा ही नजारा इन दिनों नील नदी किनारे स्थित मिस्र के तहरीर चौक पर दिखाई पड़ रहा है जहां की गतिविधियों पर विश्व भर की नजर गड़ी हुई है। वर्ष 1952 में मिस्र में हुई क्रांति के दौरान सेना ने राजशाही को उखाड़कर फेंक दिया था। इसके बाद इसे तहरीर चौक का नाम दिया था। फिलहाल प्रदर्शन का केंद्र बने इस चौक के आस-पास संग्रहालय, अरब लीग का मुख्यालय और कई अन्य महत्वपूर्ण इमारतें मौजूद हैं।

इसके साथ ही दुनिया के उन देशों की जनता अपनी धरती पर एक नए तहरीर चौक की तलाश में है जहां लोग भ्रष्ट तंत्र, तानाशाही और सियासत के सतहीपन जैसी तमाम खामियों से त्रस्त हो चुके हैं।

चीन की राजधानी बीजिंग के 'त्यानआनमेन चौक' की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। इसे 'नरसंहार चौक' के रूप में भी जाना जाता है। आर्थिक नीतियों व सरकार की निरंकुशता के खिलाफ 14 अप्रैल 1989 को विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों और बुद्धिजीवियों पर सैनिकों द्वारा निष्ठुरता के साथ की गई गोलीबारी ने दुनियाभर के लोगों को हिला कर रख दिया था।

रूस के सेंट पीट्सबर्ग में डिसेम्ब्रीष्ट्स चौक ऐतिहासिक रूप से अलग मायने रखता है। वर्ष 1925 से पहले यह पीट़्र्स चौक के नाम से प्रसिद्ध था। इसे अब सीनेट चौक के नाम से जाना जाता है। वर्ष 1825 में हुई दिसम्बर क्रांति के बाद इसका नाम बदलकर डिसेम्ब्रीष्ट्स चौक कर दिया गया था।

गौरतलब है कि 25 दिसम्बर 1825 को रूसी राजशाही के खिलाफ क्रांति भड़क उठी थी। तकरीबन 3,000 सैन्य अधिकारियों ने अपने बड़े भाई को हटाकर सत्ता पर कब्जा करने वाले रूसी जार निकोलस के कुशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। मजेदार बात है यह है कि दिसम्बर क्रांति के आधार पर ही इसका नामकरण डिसेम्ब्रीष्ट्स चौक किया गया था।

इसी तरह एशिया के तेहरान में 'आजादी चौक' भी ईरान के शाह के खिलाफ भड़के जनाक्रोश का गवाह रहा है। इस जगह को 12 दिसम्बर 1979 की ईरानी क्रांति के लिए यादगार माना जाता है।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के मध्य में स्थित ट्राफलगर चौक को नेपोलियन पर मिली ब्रिटिश नौसेना की जीत का प्रतीक माना जाता है।

अर्जेटीना के ब्यूनस आयर्स शहर में स्थित 'प्लाजा डे मायो चौक' राजनीतिक जीवन का केंद्र बिन्दु है जिसे 25 मई 1810 को मिली स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में माना जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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