पाकिस्तान में सरकारी कर्मचारियों की डिग्रियों की जांच
एक आधिकारिक घोषणा में कहा गया है, "प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने स्थापना विभाग से कहा है कि सभी संघीय सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की शैक्षिक डिग्रियों की उनके संस्थान प्रमुख द्वारा जांच की जा सकती है।"
समाचार पत्र 'डान' के मुताबिक जांच के लिए चार अप्रैल तक की समय सीमा निर्धारित की गई है।
देशभर के विभिन्न सरकारी संस्थानों में 350,000 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं।
गिलानी ने कहा है कि संघीय लोक सेवा आयोग को सरकारी नौकरियों में चयन के लिए परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की डिग्रियों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सांसदों के प्रधानमंत्री से इस सम्बंध में किए गए आग्रह के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है। इन सांसदों का मानना है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को बदनाम करने के लिए नौकरशाही के इशारे पर सांसदों की डिग्रियां सत्यापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद पिछले साल जुलाई में सांसदों की डिग्रियां सत्यापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
विभिन्न उम्मीदवारों द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाने सम्बंधी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने पाकिस्तान चुनाव आयोग को शैक्षिक डिग्रियों की जांच करने और खामियां पाए जाने पर जन प्रतिनिधियों खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग अब तक 816 निर्वाचित प्रतिनिधियों की डिग्रियां जांच चुका है, जिनमें से 60 सांसदों की डिग्रियां झूठी पाई गई थीं।
चुनाव आयोग ने हाल ही में 14 सांसदों के नाम उनके चुनावी जिलों के पुलिस कार्यालयों में भेजकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की इजाजत मांगी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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