'भारतीय बीपीओ उद्योग के लिए आराम का वक्त नहीं'
इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारतीय कम्पनियों के निवेश के कारण अमेरिका में बड़ी संख्या में रोजगार निर्मित हुए है।
नई दिल्ली के हिंदू कॉलेज से अध्ययन प्राप्त 60 वर्षीय प्रसाद को एक माह पहले न्यूजर्सी के समरसेट काउंटी की फ्रेंकलिन टाउनशिप का डिप्टी मेयर नियुक्त किया गया है। प्रसाद महिन्द्रा सत्यम बीपीओ लिमिटेड के लाइफ साइंसेज मार्केट के सहायक उपाध्यक्ष हैं।
उन्होंने बीपीओ उद्योग में भारत की प्रमुख स्थिति बरकरार रहने को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा, "यद्यपि भारत की इस क्षेत्र में प्रमुख उपस्थिति है लेकिन उसे अपनी पूर्व की उपलब्धियों के चलते निश्चिंत नहीं होना चाहिए। इस क्षेत्र में भारत को चीन और फिलीपींस से कड़ी चुनौती मिल रही है।"
प्रसाद ने आईएएनएस से साक्षात्कार में कहा कि भारतीय बीपीओ उद्योग को नए प्रयोग करने चाहिए और अगले चरण में नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिग (केपीओ) की तरफ बढ़ना चाहिए। इसके तहत भारत को उच्चस्तरीय सेवाएं, जटिल कार्यो में सहायता जैसी सेवाओं की तरह बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बीपीओ के कम मुनाफे और तेज प्रतिस्पर्धा के मुकाबले केपीओ सेवाओं में आय अधिक होती है।
भारतीय बीपीओ क्षेत्र के अमेरिकी रोजगार क्षेत्र पर असर के सम्बंध में उन्होंने कहा, "भारतीय बीपीओ क्षेत्र का अमेरिकी रोजगारों पर असर के बारे में स्पष्ट आंकड़ों का अभाव है। चुनाव प्रचार के वर्ष में इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाया गया लेकिन वर्ष 1960 के बाद से ही अमेरिकी मुक्त अर्थव्यवस्था की कोशिश सस्ते विकल्पों को खोजने की रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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