कोलकाता पुस्तक मेले में नक्सलवाद, आजाद और बिनायक सेन छाए
मिलन मेला मैदान में आयोजित इस पुस्तक मेले में आजाद के लेख संग्रह, बाल रोग विशेषज्ञ व मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन पर लिखी लघु पुस्तिकाएं और नक्सली आंदोलन के समर्थन में लिखी गई पुस्तिकाएं ज्यादा संख्या में थीं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) अन्य दूसरे राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित नहीं है।
सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाली 'माओइज्म, स्टेट एंड इंडियन कम्युनिस्ट मूवमेंट', 'डॉ. बिनायक सेन', 'प्रोस्टीट्यूशनलाइजेशन ऑफ जस्टिस : लाइफ टर्म ऑफ बिनायक', 'आजाद एंड हिज राइटिंग्स' और 'एट दिस मूमेंट' जैसी पुस्तिकाओं को यहां खूब खरीददार मिले।
लिबरेशन प्रकाशन की 'माओइज्म, स्टेट एंड इंडियन कम्युनिस्ट मूवमेंट' पुस्तिका में लेखक अरिंदम सेन ने 'ग्रीन हंट: ए वार अगेंस्ट डेमोक्रेसी, स्टेंड अगेंस्ट इट' का नारा दिया है।
'बिनायक सेन' पुस्तिका में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ प्रशासन ने किस तरह सेन के खिलाफ आरोप गढ़े और उन्हें राजद्रोह व नक्सलियों से सम्पर्क रखने का दोषी बताया। पुस्तिका में लोगों से सरकार के खिलाफ एकजुट होने और सेन की तुरंत रिहाई की मांग उठाने की बात कही गई है।
कई पुस्तिकाओं में लालगढ़ आंदोलन को बयां किया गया है तो कुछ में जनजातीय लोगों के खिलाफ सरकारी नीतियों का विरोध किया गया है।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल व पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन की नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों से नक्सलियों और नक्सली विचारधारा के प्रति सहानुभूति न रखने की अपील के बावजूद पुस्तक मेले में इस तरह के प्रकाशनों की भरमार रही।
चिदम्बरम ने बुद्धिजीवियों से नक्सली विचारधारा को बढ़ावा न देने और उसका समर्थन न करने के लिए कहा था। चिदम्बरम ने यह चेतावनी भी दी थी कि नक्सलियों से सहानुभूति रखने वालों के प्रति कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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