जनता को रिझाने के लिए माकपा ने पुस्तक प्रकाशित की
राज्य में 34 साल पहले सत्ता में आने वाली माकपा इस समय अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'गणशक्ति' ने इस पुस्तक को प्रकाशित किया है। इसमें नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन और दिवंगत मार्क्सवादी नेता ज्योति बसु के लेख छापे गए हैं।
इस पुस्तक का नाम 'वामफ्रंट सरकार : मानुष-ए शेष कथा' है, जिसका शनिवार को लोकार्पण हुआ।
प्रकाशित किताब में अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक और जयति घोष सहित माकपा के संस्थापक ई.एम.एस. नम्बूदरीपाद, बी.टी.रणदीव, एम.बसावपुनैया, हरे कृष्ण कोनर, प्रमोद दासगुप्ता और नृपेन चक्रवर्ती के लेख शामिल किए गए हैं। पुस्तक की कीमत 300 रुपये है।
पुस्तक में राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य का भी एक लेख 'वामपंथी पथ' छपा है जिसमें उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात और वाम मोर्चे को मिल रही चुनौतियों के बारे में जिक्र किया है।
प्रसिद्ध अर्थशात्री अमर्त्य सेन का शोधपरक लेख 'प्राइमरी स्कूलिंग : ए रिपोर्ट ऑन इम्प्रूब्मेंट्स एंड प्राब्लम्स इन वेस्ट बेंगाल' को किताब में शामिल किया गया है।
किताब की प्रस्तावना में राज्य माकपा सचिव बिमान बोस ने कहा है, "किताब हमारे नेताओं की लेखनी के जरिए जनसंघर्षो की कहानी बयां करती है। इससे वाम दल के सत्ता में आने, गठबंधन सरकार के अनुभव, जनवादी वाम मोर्चे की वैकिल्प नीतियों के बारे में जानकारी मिलेगी। साथ ही साजिशों और हमलों के खिलाफ पार्टी की लड़ाई भी उजागर होती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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