सरकार सभी को भोजन मुहैया नहीं करा सकती: प्रधान न्यायाधीश
हैदराबाद में 17वें राष्ट्रमंडल कानून सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कपाड़िया ने कहा कि सभी लोगों तक हर चीज पहुंचाना संभव नहीं है लेकिन गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें सुविधा दिए जाने की आवश्यकता है।
कपाड़िया ने कहा, "खाद्य पदार्थो की पहुंच एक सी नहीं हो सकती। एक अरब की जनसंख्या में प्रत्येक व्यक्ति तक नहीं पहुंचा जा सकता लेकिन जो लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं उनकी जरूरतो को पूरा किया जा सकता है।"
देश के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि बुनियादी सुविधाएं और बुनियादी सामाजिक चीजें पहले ही मुहैया कराई जा चुकी हैं और हम विकास के साथ इसका संतुलन बना सकते हैं और ऐसा कर हम आम आदमी की सहायता कर सकते हैं।
हैदराबाद में शनिवार से शुरू हुए पांच दिनों के इस सम्मेलन में 54 राष्ट्रमंडल देशों के 800 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में न्यायाधीश, न्यायविद् और कानून विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को औपचारिक तौर पर इस सम्मलेन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन भारत में चार दशकों बाद आयोजित किया जा रहा है।
प्रधान न्यायाधीश ने मनमोहन सिंह से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की तरह ही भारतीय नियामक सेवा शुरू करने पर विचार करने का आग्रह किया।
कपाड़िया ने कहा, "यह काफी महत्पूर्ण कदम है क्योंकि हमें विशेषज्ञों की आवश्यकता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में एक आयकर आयुक्त नहीं है जो निश्चित मामलों की देखरेख कर सके। नियामक कानूनों के लिए हमें विशेषज्ञों की आवश्यकता है, जिसका लाभ लोगों को मिलेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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