'ग़ज़ा पहुँच सकती है मिस्र की आग'

मिस्र में जारी आंदोलन मध्य-पूर्व के अन्य देशों की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है
मध्य-पूर्व में शांति को बढ़ावा देने के लिए बने गुट की एक बैठक शनिवार को जर्मनी के शहर म्यूनिख में हो रही है.
सुरक्षा मामलों से संबंधित इस सालाना बैठक में मिस्र और दूसरे अरब देशों में जारी हालात पर चर्चा हो रही है. इस गुट में अमरीका और रूस के विदेश मंत्रियों के अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव और यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रतिनिधि शामिल हैं.
बीबीसी के राजनयिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांतिवार्ता के रुक जाने से पश्चिमी देशों में जो चिंता है वो मिस्र में मची ऊथल पथल से और भी बढ़ गई है.
किसी को नहीं मालूम की मिस्र में किस तरह की सरकार बनेगी और इसराइल के साथ शांति को लेकर उसका रवैया क्या होगा.
मिस्र में होसनी मुबारक हुकुमत और इसराइल के बीच लंबे समय से रिश्ते बेहतर रहे हैं.
इसराईल पर दबाव
ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि मिस्र में उभर रहे संकट से जो बड़ा सबक़ मिला है वो ये है कि इसराइल और फलस्तीनियों के बीच विवाद को जल्द से जल्द सुलझाना ज़रूरी है और दो राष्ट्र बनाकर इसे निपटाना देना चाहिए.
हालांकि ये गुट इसराइल और फ़लस्तीनी प्रशासन को बात-चीत को आगे बढ़ाने के लिए कह भर सकता है.
इस मामले में पिछले दो वर्षों में अमरीका के सभी प्रयास असफल रहे हैं.
शांतिवार्ता से जुड़ा गुट इस बात पर भी ध्यान देगा कि अमरीकी विदेश मंत्री इस मामले पर किस तरह का पैग़ाम लेकर आती हैं.
इस बीच गुट इसराइल पर इस बात के लिए दबाव बना रहा है कि वो गज़ा पट्टी में स्थिति में सुधार लाए और फ़लस्तीनी प्रशासन के कार्य क्षेत्र में किसी तरह की बाधा न उत्पन्न करे.
डर इस बात का है कि शांति वार्ता में किसी तरह की प्रगति की अनुपस्थित में मिस्र में ऊपजी अशांति फ़लस्तीनी इलाक़ों तक पहुँच जाएगी.












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