उल्फा 10 फरवरी से शुरू करेगा बिना शर्त वार्ता
उल्फा के 'विदेश सचिव' साशा चौधरी ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा कि शांति वार्ता के 10 फरवरी से शुरू होने की सम्भावना है। इसमें उल्फा और सरकार बिना शर्त बात चीत शुरू कर रहे हैं। उल्फा नेताओं की ओर से यह इस तरह का पहला औपचारिक बयान है।
उन्होंने कहा कि महासभा में बिना शर्त शांति वार्ता शुरू करने का फैसला लिया गया है।
इस वार्ता में उल्फा के दल का नेतृत्व उल्फा अध्यक्ष अरविंद राजखोवा करेंगे। सरकारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम या गृह सचिव जी. के. पिल्लई कर सकते हैं।
इस वार्ता में सरकार की ओर से नियुक्त वार्ताकार पी. सी. हलदर और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के भी हिस्सा लेने की सम्भावना है।
चौधरी ने कहा कि वह महासभा में लिए गए फैसलों से कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ को भी अवगत करा देंगे। उन्हें विश्वास है कि बरुआ फैसले को स्वीकार कर लेंगे। "वह इस फैसले को स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं," चौधरी ने स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग वार्ता प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं और हमें ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए।
आगामी विधान सभा चुनाव में उल्फा का इस्तेमाल सत्ताधारी कांग्रेस के लिए किए जाने की सम्भावना पर उन्होंने कहा कि इस समय चुनाव में उनकी कोई भूमिका नहीं रहेगी।
उल्फा के भगोड़े कमांडर इन चीफ परेश बरुआ को छोड़ कर संगठन के सभी अन्य प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन सरकार ने शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की योजना के तहत इन सभी नेताओं को जमानत पर रिहा कर दिया है। इनमें अरविंद राजखोवा, प्रदीप गोगोई, उप कमांडर इन चीफ राजू बरुआ, चौधरी, वित्त सचिव चित्रबान हजारिका, सांस्कृतिक सचिव प्रणति देका और वैचारिक सूत्रधार भीमकांत बुरागोहेन शामिल हैं।
परेश बरुआ के चीन-म्यांमार सीमा पर छुपे होने की सम्भावना है। शांति वार्ता पर उनका नजरिया अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
उल्फा का गठन 1979 में एक अलग असम होमलैंड बनाने के मकसद से किया गया था। पिछले 30 सालों में असम में जारी अस्थिरता में 10,000 लोग मारे गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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