संसद भवन के सामने शहीद उन्नीकृष्णन के चाचा का आत्मदाह
केरल के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन भी उन्ही जांबाज सिपाहियों में से एक थे जिन्होने उस हमले में देश को बचाने के लिए अपने प्राणों की बलि चढ़ा दी थी। गुरुवार की शाम संसद भवन के सामने एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने आत्मदाह की कोशिश की। बाद में पता चला कि वह व्यक्ति शहीद मेजर उन्नीकृष्णन के सगे चाचा हैं। जानकारी के मुताबिक, वह अब तक अपने भतीजे की मौत के आघात से उबर नहीं सके हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह मुंबई पीड़ितों के लिए सरकार के रुख से काफी परेशान थे, इसलिए उन्होने ये कदम उठाया।
पुलिस के मुताबिक केरल के कोझिकोड़ निवासी के. मोहानन ने शाम 6 बजे के करीब विजय चौक के समीप संसद भवन के द्वार संख्या 4 के बाहर अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा ली। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की और पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पुलिस मोहानन को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गई जहां उनका इलाज किया जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक मोहनन 85 प्रतिशत तक जल चुके हैं और उनकी हालत नाजुक है।
पता चला है कि, मोहानन ने मलयालम भाषा में लिखित अपने सुसाइड नोट में अपने इस कदम को उठाने के पीछे सरकार को दोषी ठहराया है। उन्होने नोट में लिखा है कि, मुम्बई हमलों के पीड़ितों के साथ सरकार जिस तरह से बर्ताव कर रही है, उससे वह काफी दुखी हैं। मोहानन संदीप के पिता के छोटे भाई हैं। अधिकारी ने बताया, "हमें लगता है कि मोहानन राजधानी में गत 30 जनवरी को पहुंचे।" पुलिस को मोहानन के पास से एक रेलगाड़ी का टिकट और नोट बुक मिला है।













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