पटना में वरिष्ठ चिकित्सकों की राय, टूटनी चाहिए हड़ताल
पटना के जाने-माने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ़ उत्पलकांत सिंह ने कहा कि गया मेडिकल कॉलेज अस्पताल की घटना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच कराकर सरकार को तुरंत दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन वह यह भी कहते हैं कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए जूनियर डॉक्टरों को हड़ताल तत्काल वापस लेनी चाहिए।
जाने माने चिकित्सक डॉ़ एस़ एऩ झा भी कहते हैं कि चिकित्सकों का हड़ताल पर जाना मरीजों व उनके अभिभावकों की परेशानी को बढ़ाता है। इस कारण किसी भी समस्या का समाधान किसी की परेशानी को बढ़ाकर नहीं किया जा सकता। वैसे वह चिकित्सकों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न् खड़ा करते हैं।
पटना के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ़ आऱ एऩ सिंह ने स्पष्ट कहा कि इस स्थिति में सरकार और जूनियर डॉक्टर दोनों दोषी हैं। वह कहते हैं कि अगर आज किसी नेता के साथ कुछ होता तो सुरक्षा बढ़ा दी जाती परंतु चिकित्सकों के साथ अक्सर दुर्व्यवहार किया जाता है और इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। वह कहते हैं कि जूनियर डॉक्टर्स का विरोध करना ठीक है परंतु उन्हें मरीजों की परेशानी का भी ध्यान रखना चाहिए।
इधर, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ़ अरूण कुमार मानते हैं कि हड़ताल चिकित्सकों का हथियार नहीं होना चाहिए। चिकित्सकों की हड़ताल मरीजों की परेशानी को बढ़ाती है। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए पहल की जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि एएनएमसीएच में रविवार की देर रात बेलागंज के विधायक सुरेंद्र प्रसाद यादव के दो अंगरक्षकों द्वारा कथित तौर पर गोली चलाए जाने से तीन जूनियर डॉक्टर घायल हो गए थे। तभी से राज्य के सभी छह मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। वैसे पुलिस ने दोनों सुरक्षाकर्मियों को निलम्बित करते हुए गिरफ्तार कर लिया है और विधायक की भी गिरफ्तारी का आदेश दे दिया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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