आतंकवाद से संयुक्त रूप से लड़ेंगे भारत और अफगानिस्तान (लीड-1)

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने आवास पर राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की। उन्होंने अफगानिस्तान में भारत द्वारा किए जा रहे विकास कार्यो एवं भारतीयों की सुरक्षा सहित द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

ज्ञात हो कि करजई भारत की दो दिन की यात्रा पर बुधवार रात यहां पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया कि हिंसाग्रस्त देश में विकास परियोजनाओं में कार्यरत करीब 4000 भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार हरसंभव कदम उठा रही है।

समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान में कथित उदार तालिबान के एकीकरण को लेकर जारी वार्ता के संदर्भ में भारतीय आशंकाओं को करजई के समक्ष उठाया।

भारत की यह आशंका खासकर पाकिस्तान द्वारा अपने कूटनीतिक फायदे के लिए एकीकरण प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों से उत्पन्न हुई है।

करजई ने प्रधानमंत्री को प्रस्तावित तालिबान एकीकरण प्रक्रिया की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया कि हिंसा को त्यागने वाले और अफगानिस्तान के संविधान को स्वीकार करने वाले तालिबान को ही भविष्य में सत्ता का भागीदार बनाने पर विचार किया जाएगा।

ज्ञात हो कि इस महीने की शुरुआत में अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी एक शिष्टमंडल के साथ इस्लामाबाद की यात्रा पर गए थे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य तालिबान के साथ शांति कायम कराने में पाकिस्तान की मध्यस्थता की मांग थी।

पूर्व राष्ट्रपति की पाकिस्तान के नेताओं के साथ बैठक पर भारत ने गहराई से निगरानी रखी। साथ ही विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने इस महीने की शुरुआत में अपनी काबुल यात्रा के दौरान इस मुद्दे को अफगानिस्तान के नेतृत्व के समक्ष उठाया।

जानकार सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज को प्रस्तावित चरणबद्ध तरीके से हटाए जाने के परिप्रेक्ष्य में सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा की। अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी जुलाई से शुरू होनी है।

दोनों नेताओं की बीच वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त बयान में बताया गया, "दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए भारत और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक भागीदारी का होना जरूरी है।"

बयान के मुताबिक करजई ने भारत द्वारा करीब 1.3 अरब डॉलर की मदद करने पर धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "क्षेत्र में स्थिरता और दोनों देशों के लोगों के हितों के लिए भारत और अफगानिस्तान को एक साथ काम करने की जरूरत है।"

प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान का दौरा शीघ्र करने के लिए करजई के निमंत्रण को स्वीकार किया। प्रधानमंत्री के साथ वार्ता के बाद करजई राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से भी मिलने पहुंचे। इसके बाद वे एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए म्यूनिख रवाना हो गए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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