'चाऊर वाले बाबा' अब चना बाटेंगे
नई दिल्ली, 3 फरवरी (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ की गरीब व जनजातीय जनता को एक रुपये प्रति किलो की दर से चावल उपलब्ध कराकर 'चाऊर वाले बाबा' के नाम से मशहूर हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह अब अपनी जनता को जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत चना उपलब्ध कराने की योजना पर गम्भीरता से काम कर रहे हैं।
आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की बैठक में शामिल होने दिल्ली आए रमन सिंह ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में नक्सलवाद से लेकर विकास से जुड़े कई मुद्दों पर बेबाकी से बातचीत की।
राज्य में जन वितरण प्रणाली के तहत गरीबों और दलितों को चना मुहैया कराने की अपनी नई योजना के बारे में उन्होंने कहा, "केंद्रीय खाद्य मंत्री के. वी. थामस के साथ मेरी बैठक हुई है और इस संदर्भ में चर्चा भी हुई है। हम इस योजना को सबसे पहले जनजातीय क्षेत्र में आरम्भ करना चाहते हैं। हमारी योजना है कि जनजातीय क्षेत्र के गरीबों के लिए जन वितरण प्रणाली के तहत सस्ते दर पर चना उपलब्ध कराया जा सके।"
चावल का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में रमन सिंह ने पहली बार गरीब जनता को तीन रुपये किलो चावल मुहैया कराया और अब उनकी सरकार दो रुपये व एक रुपये की दर से चावल मुहैया करा रही है। उनकी यह योजना इतनी प्रसिद्ध हुई कि लोग उन्हें चाऊर वाले बाबा के नाम से पुकारने लगे।
अबूझमाड़ के जंगलों से नक्सलियों को साल भर के भीतर हटाए जाने सम्बंधी मीडिया में छपी खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "अबूझमाड़ के जंगल 5000 वर्ग किलोमीटर में फैले हैं। मेरा मानना है कि अब हमें इस क्षेत्र में प्रवेश करना चाहिए। वहां विकास के काम किए जाने चाहिए।"
उन्होंने कहा, "सुरक्षा बलों के साथ इस क्षेत्र में जाकर विकास कार्यो को अंजाम दिया जाना चाहिए। अबूझमाड़ के जंगलों से तीन राज्यों की सीमाएं सटती हैं इसलिए तीनों राज्यों को मिलकर इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। इसमें केंद्र सरकार के सहयोग की भी आवश्यकता है।"
छत्तीसगढ़ में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर आए खर्च का बोझ केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार पर डाले जाने पर रमन सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार ने हमसे इसके तहत 800 करोड़ रुपये मांगे हैं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के लिए यह बहुत बड़ी राशि है। इस राशि का कई विकासात्मक कार्यो में इस्तेमाल हो सकता है। नक्सलवाद चूंकि राष्ट्रीय समस्या है इसलिए केंद्र सरकार को इन खर्चो को वहन करना चाहिए और राज्य सरकार को इससे मुक्त किया जाना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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