राजा 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजे गए (लीड-2)
अदालत ने उनके दो सहयोगियों को भी सीबीआई हिरासत में भेज दिया। विशेष न्यायाधीश ओ.पी. सैनी ने कहा राजा, दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर. के. चंदोलिया को सीबीआई हिरासत में भेजा जाना 'न्यायोचित' है।
सैनी ने कहा, "आरोपियों के खिलाफ अभियोग है कि उन्होंने स्पेक्ट्रम लाइसेंस जारी करने के दौरान नियमों और प्रक्रियायों का उल्लंघन किया जिसकी वजह से सरकार को 22 हजार करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा हुआ।"
उन्होंने कहा, "तीनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर मामले हैं। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों से आगे पूछताछ की जरूरत है।"
सैनी ने कहा, "तीनों आरोपियों की हिरासत की मांग न्यायोचित है और इन्हें आठ फरवरी तक सीबीआई की हिरासत में भेजा जाता है।"
अदालत ने कहा कि सभी आरोपियों की हर 48 घंटे पर चिकित्सीय जांच की जाएगी और प्रत्येक दिन उनके परिजन और वकील आधे घंटे के लिए उनसे मिल सकेंगे।
अदालत ने बेहुरा को पांच फरवरी को इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल जाने की अनुमति भी प्रदान कर दी जिससे वह अपनी बीमार पत्नी से मिल सकें। उनकी पत्नी का आपरेशन होने वाला है।
गौरततलब है कि सीबीआई ने राजा, उनके सहयोगी पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और पूर्व निजी सचिव आर. के. चंदोलिया को बुधवार को गिरफ्तार किया था। तीनों आरोपियों को गुरुवार को पटियाला हाउस अदालत में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओ. पी. सैनी की अदालत में पेश किया।
जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 2जी आवंटन मसले पर याचिका दाखिल कर राजा को आरोपी बनाया था जिसे अब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला कहा जाता है। इस मसले पर सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
सर्वोच्च न्यायालय स्वयं इस मामले की जांच की निगरानी कर रहा है, जिसकी जांच कई एजेंसियां कर रही हैं। इस मामले में न्यायालय ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से 10 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि 2जी आवंटन में घोटाले का विवाद उठने के बाद राजा ने पिछले साल 14 नवम्बर को इस्तीफा दिया था। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में राजा की कथित भूमिका की ओर संकेत किया था और कहा था इसकी वजह से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
वर्ष 2008 में कुछ नई कम्पनियों को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन किया गया था जिसमें कथित रूप से निर्धारित प्रक्रिया और मानदंडों की अनदेखी का आरोप है। राजा पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर बाजार दर से कम कीमत पर स्पेक्ट्रम का आवंटन किया। इस मसले पर विपक्ष की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग के मुद्दे पर संसद का शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया था और कोई कामकाज नहीं हो पाया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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