हिमगिरि हादसे की उच्चस्तरीय जांच की मांग

मंगलवार को शाहजहांपुर के रोजा स्टेशन के समीप हिमगिरि एक्सप्रेस की छत पर बड़ी संख्या में सवार अभ्यर्थियों में से 20 से अधिक ओवरब्रिज से टकरा गए थे। अभ्यर्थी बरेली से आईटीबीपी की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर लौट रहे थे।

हादसे में बुरी तरह से घायल पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी मुबारक अली के बड़े भाई मारूफ अली ने गुरुवार को आईएएनएस से कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां रेलगाड़ी की छत पर चढ़ने को मजबूर किए गए अभ्यर्थियों पर ही हादसे का ठीकरा फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से बच रही हैं जबकि इस बात का विस्तृत विश्लेषण होना चाहिए कि किन परिस्थितियों में अभ्यर्थी रेलगाड़ी की छत पर चढ़े।

मुबारक का लखनऊ के छत्रपति शाहू जी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय (सीएसएमएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में उपचार चल रहा है। हादसे में उसके सिर और आंख पर गम्भीर चोटें आई हैं।

मारूफ ने आरोप लगाया कि 11 राज्यों से भर्ती प्रक्रिया के लिए एक जगह इतने अभ्यर्थियों को एकत्र करना भारी भूल थी, जो बाद में हादसे का कारण बनी।

बिहार निवासी राम आसरे, जिनका 18 वर्षीय पुत्र घायल होकर सीएसएमएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है, उनका कहना है कि जब एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों को बुलाया गया था, तो उसी के अनुसार रेलवे और अन्य सरकारी एजेंसियों ने परिवहन सम्बंधी पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए। उन्होंने कहा कि अगर इन सब पहलुओं पर एक उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो पूरा बरेली जिला प्रशासन, पुलिस, रेलवे और आईटीबीपी के असली चेहरे और लापरवाही सामने आ जाएंगे।

परिजनों का कहना है कि घटना के दो दिन बीत जाने के बाद न तो किसी मंत्री, न किसी सरकारी एजेंसी के अधिकारी और न ही किसी राजनीतिक दल के नेता ने उनके पास आकर उनका पक्ष की जानने की कोशशि की है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि रेलवे, आईटीबीपी और पुलिस को आगे आकर हादसे के प्रति अपनी-अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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