मुबारक ने कहा अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे

उन्होंने कहा है कि वो अपने शासनकाल के बचे हुए दिनों में शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता परिवर्तन के लिए काम करेंगे. विपक्षी राजनीतिज्ञों की कड़ी आलोचना करते हुए मुबारक ने कहा कि उन्होंने एक शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे प्रदर्शन में आग में घी डालने का काम किया.
सरकारी टीवी पर देश की जनता को संबोधित करते हुए मुबारक ने कहा, "मैं मिस्र की ही ज़मीन पर मरूंगा." राष्ट्रपति मुबारक ने कहा कि उन्होंने अपने उप-राष्ट्रपति से कहा है कि वो विपक्षी दलों से संविधान में सुधार के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू करें.
मुबारक ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका इरादा फ़ौरन सत्ता छोड़ने का नहीं है. उनके भाषण के फ़ौरन बाद काहिरा और अन्य बड़े शहरों में जमा लाखों की भीड़ ने "मुबारक भागो, मुबारक जाओ" के नारे लगाए. भीड़ में खड़े कई लोगों ने कहा कि उन्हें मुबारक का ये प्रस्ताव मंज़ूर नहीं है और वो फ़ौरन उनका इस्तीफ़ा चाहते हैं.
लेकिन इसके बावजूद काहिरा में तहरीर चौक पर उत्सव का माहौल था. लोगों ने कहा कि वो तबतक संघर्ष करेंगे जब तक मुबारक चले नहीं जाते. एक का कहना था, "मुबारक फ़ौज से हैं वो इस तरह से नहीं भागना चाहेंगे. वो चाहते हैं कि उनहें सम्मानपूर्ण विदाई मिले लेकिन हम ऐसा नहीं चाहते." भाषण के बाद भी तहरीर चौक से मुबारक के ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे.
तहरीर चौराहे का माहौल
विपक्षी नेता अल बारादेई समेत कई अन्य लोगों ने राष्ट्रपति मुबारक से इस शुक्रवार तक सत्ता छोड़ देने का मांग की है.
भाषण से पहले अल बारादेई ने अल अरबिया टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, “लोगों को उम्मीद है कि ये सब आज या ज़्यादा से ज़्यादा शुक्रवार तक ख़त्म हो जाएगा. लेकिन मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति मुबारक उसके पहले ही 30 सालों की सत्ता को छोड़ देंगे और लोगों को मौका देंगे क्योंकि मुझे नहीं लगता कि वो भी और ख़ूनखराबा देखना चाहेंगे."
इस बीच विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वो किसी बातचीत में तबतक हिस्सा नहीं लेंगे जबतक मुबारक इस्तीफ़ा नहीं दे देते. उन्होंने कहा है कि वो एक गठबंधन बना चुके हैं जो बदलाव की चाह रखनेवालों के प्रतिनिधि के तौर पर बात करेंगे.
अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी समझे जानेवाले वरिष्ठ नेता जॉन केरी ने भी राष्ट्रपति मुबारक से पद छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि उन्हें अब फिर से चुनाव में नहीं खड़ा होना चाहिए. वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि जो भी नई सरकार बनती है वो इसराइल और मिस्र की शांति संधि का सम्मान करेगी.
बीबीसी के विश्व मामलों के संवाददाता जॉन सिंपसन का कहना है कि कि संभवत: प्रदर्शनकारी एक बार फिर शुक्रवार को ज़ोर लगाएंगे और राष्ट्रपति भवन तक रैली निकालेंगे.
मुबारक गए तो क्या होगा?
क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड?
इस राजनीतिक अंसतोष का असर मिस्र की अर्थव्यवस्था पर भी नज़र आ रहा है. लोग गाना गा रहे हैं, ढोल बजा रहे हैं, नारे लगा रहे हैं. बैंक बंद हैं, ये अंदाज़ा भी नहीं है कि वो कब खुलेंगे और मुख्य शहरों में कारोबार ठप्प सा है.
बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्रयू वाकर का कहना है कि इस माहौल का असर विदेशी निवेश पर भी पड़ेगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका असर दिखेगा यदि स्वेज़ नहर से आवाजाही बंद हो जाती है.
फ़िलहाल ये चल रहा है लेकिन इसमें किसी तरह की अड़चन से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर होगा. मिस्र की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है लेकिन इन प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद से बहुत सारे पर्यटक देश छोड़कर निकल रहे हैं.












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